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जानकारी के अनुसार, करगहर प्रखंड क्षेत्र के अमवलिया गांव निवासी सुहागिनी कुंवर अपने चार पोतों—टप्पू, अमरजीत, प्रीति कुमारी और प्रतिमा कुमारी—के साथ प्रखंड कार्यालय पहुंचीं थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने और लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाने का निर्णय लिया। वृद्धा ने बताया कि करीब ढाई वर्ष पहले उनके बेटे और बहू की मौत हो गई थी। इसके बाद चारों बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए परवरिश योजना के तहत अब तक कोई सहायता राशि नहीं मिली। इतना ही नहीं, बेटे-बहू की मौत के बाद कबीर अंत्येष्टि योजना और पारिवारिक लाभ योजना की राशि भी अब तक नहीं दी गई।
सुहागिनी कुंवर का कहना है कि वे प्रखंड से लेकर जिला कार्यालय तक कई बार आवेदन दे चुकी हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। आर्थिक तंगी इस कदर बढ़ गई कि अब भीख मांगकर बच्चों का पेट भरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि निराश होकर उन्होंने बच्चों के साथ जीवन समाप्त करने का फैसला कर लिया था।
घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों ने वृद्धा को समझाकर आत्मदाह करने से रोका। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि कुछ कर्मचारी और अधिकारी मदद करने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त दिखे। वहीं मामले को लेकर बीडीओ अजीत कुमार ने कहा कि वृद्धा की समस्याओं को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।