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मिली जानकारी के अनुसार, दिनेश मुसहर का परिवार सोन नहर कैनाल के किनारे मड़ई बनाकर निवास करता है। गुरुवार की रात दिनेश घर में सो रहा था, तभी किसी विषैले सांप ने उसे डस लिया। परिजनों को घटना की जानकारी मिलते ही उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने के लिए कई स्थानों पर ले जाया गया। काफी समय तक यही प्रयास चलता रहा, लेकिन युवक की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सर्पदंश के तुरंत बाद युवक को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचाया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। इलाज में हुई देरी इस हादसे का सबसे बड़ा कारण बनी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या झाड़-फूंक पर भरोसा न करें। मरीज को बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) के माध्यम से प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। समय पर चिकित्सा ही सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने का सबसे कारगर उपाय है।