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कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया भर में तीसरा सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है, इस कैंसर के प्रति जागरूकता लाने के लिए 1 मार्च से 31 मार्च तक राष्ट्रीय कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह मनाया जाता है, यह किसी भी उम्र में किसी को हो सकता है इसकी शुरुआत बड़ी आत की दीवार की सबसे भीतरी परत में सूजन से होती है, इस कैंसर के लक्षण है व्यक्ति को हमेशा कमजोरी और थकान, भूख नहीं लगना, वजन कम होना, एनीमिया, पेट में दर्द या बेचैनी, मल में हमेशा खून आना, गैस्ट्रिक, पेट में ऐठन और दर्द आदि समस्या रहती है।
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इन लक्षणों को लोग साधारण पेट की समस्या मानकर बिना चिकित्सीय सलाह के दवा का सेवन करते हैं यह सब लक्षण बड़ी आंत के कैंसर की ओर इशारा करते हैं, यदि इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज से पीड़ित हो तो जांच जरूरी हो जाती है, बड़ी आंत के कैंसर से बचाव के लिए वसा वाले भोजन से दूरी बनाए रखना और फलों को शामिल करना जरूरी है, मोटापा से बचाव, सही वजन के लिए नियमित व्यायाम आदि का ध्यान रखना भी जरूरी है, धूम्रपान और शराब से भी पेट की आंत को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए रोजाना 30 मिनट तक व्यायाम जरूरी है।
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भोजन में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी इसके अलावा मोटापा भी एक बड़ा जोखिम होता है ऐसे खाद्य प्रदार्थ फल, सब्जी जिसमे फाइबर होता है, फाइबर वाले खाद्य पदार्थ पेट को आसानी से साफ करते हैं, फाइबर नहीं होने से आंतों का काम करना बंद होने लगता है, फाइबर भोजन को बड़ी आंत में ले जाते हैं जिससे पाचन की प्रक्रिया में मदद मिलती है।
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फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों में चोकर सहित गेहूं के आटे, हरी पत्तेदार सब्जियां, सेब, पपीता, अंगूर, खीरा, टमाटर, प्याज, छिलके वाली दाल, सलाद, ईसबगोल की भूसी, दलिया, सूजी में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है इसे अपने आहार में शामिल करने से बड़ी आंत के कैंसर से बचा जा सकता है।
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