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पुर्व से चले आ रहे विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट दोनों पक्षों से एक-एक घायल

Bihar: कैमूर जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के छोटकी लोहरा एवं गांगोडीह के दो पक्षों के बीच रविवार की सुबह पूर्व से चले आ रहे विवाद को लेकर जमकर मारपीट हुई, मारपीट के दौरान दोनों पक्षों से एक-एक व्यक्ति के घायल हो जाने का मामला सामने आया है, जिन का इलाज चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में चल रहा है।

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दूसरा पक्ष
दूसरा पक्ष

मारपीट की घटना से संबंधित जानकारी देते हुए ग्राम छोटकी लोहरा के निवासी सुगन कुमार पिता धुरफेंकन बिंद के द्वारा बताया गया रविवार की सुबह 7:30 बजे के करीब यह शौच करने के लिए गांव से पूरब की तरफ खेत में गए थे, उस दौरान पूर्व के विवाद को लेकर रमुन बिंद पिता स्वर्गीय सुरेश बिंद एवं विजेंद्र कुमार पिता रमुन बिंद दोनों के द्वारा घेर कर लाठी डंडे से मारपीट की जाने लगी, जिसमें यह घायल हो गए, मारपीट की सूचना पर मौके पर घर के और अन्य सदस्य पहुंच गए उन लोगों के साथ भी मारपीट की गई है।

बिहार के अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में 9वीं और 11वीं में नामांकन शुरू, 3 नवंबर तक करें ऑनलाइन आवेदन

Bihar: बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं एवं 11वीं में निःशुल्क नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत राज्य के मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन एवं पारसी समुदायों के पात्र छात्र-छात्राएं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 3 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राज्य के 13 जिलों में संचालित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में नामांकन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

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13 जिलों में संचालित हैं अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय

बिहार के दरभंगा, किशनगंज, नालंदा, कैमूर, मुजफ्फरपुर, जमुई, कटिहार, सहरसा, सुपौल, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, रोहतास और मुंगेर जिलों में अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

छह लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थी कर सकते हैं आवेदन

नामांकन के लिए निर्धारित पात्रता के अनुसार, कक्षा 9वीं में प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों की अधिकतम आयु 16 वर्ष और कक्षा 11वीं में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। अभ्यर्थी के परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों का चयन प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार मेधा सूची के अनुसार किया जाएगा।

भोजन से लेकर किताब और दवा तक की सुविधा निःशुल्क

अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में चयनित छात्र-छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा के साथ भोजन, वस्त्र, दवा और पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। विद्यालयों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त आधुनिक प्रयोगशालाओं और उच्च माध्यमिक स्तर पर विज्ञान के PCM एवं PCB संकाय तथा कला (Arts) की पढ़ाई की सुविधा भी उपलब्ध है। नामांकन में बालिकाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। वहीं, बालक एवं बालिका दोनों वर्गों में 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के आरक्षण नियमों का पालन किया जाएगा।

 आवेदन से लेकर नामांकन तक की महत्वपूर्ण तिथियां

– *ऑनलाइन आवेदन:* 15 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक
– *प्रवेश-पत्र डाउनलोड:* 7 से 10 नवंबर 2026 तक
– *प्रवेश परीक्षा:* 12 नवंबर 2026
– *परीक्षाफल प्रकाशन:* 25 नवंबर 2026
– *नामांकन:* 1 से 7 दिसंबर 2026 तक
– *नया सत्र प्रारंभ:* 8 दिसंबर 2026

इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

ऑनलाइन आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को जाति, आय एवं आवासीय प्रमाण-पत्र, शैक्षणिक योग्यता संबंधी प्रमाण-पत्रों की स्व-अभिप्रमाणित प्रतियां, फोटोग्राफ, हस्ताक्षर और आयु प्रमाण-पत्र अपलोड करना होगा। जाति, आय और आवासीय प्रमाण-पत्र अंचलाधिकारी द्वारा निर्गत होना चाहिए।

यहां करें ऑनलाइन आवेदन

इच्छुक विद्यार्थी बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन लिंक: https://minority.bihar.gov.in/schoolmis/ योजना एवं नामांकन से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए विद्यार्थी अपने जिले के अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://state.bihar.gov.in/minoritywelfare/CitizenHome.html पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की इस पहल का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के पात्र विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की सलाह दी गई है।

संपादकीय नोट: प्रकाशन से पहले विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन की तिथियों, आयु सीमा, आरक्षण और पात्रता संबंधी शर्तों का मिलान कर लें।

वहीं इस मामले में दूसरे पक्ष से रमुन बिंद पिता स्वर्गीय सुरेश बिंद एवं विजेंद्र कुमार पिता रमुन बिंद जिसमें रमन बिंद का मारपीट में सर फटा है, इनके द्वारा बताया गया कि यह अपने खेत में पटवन की लिए तैयारी कर रहे थे, उस दौरान सुगन कुमार पिता धुरफेकन बिंद के द्वारा गाली-गलौज किया जाने लगा और मारपीट की जाने लगी जिसमें इनका सर फट गया जबकि उनके पुत्र विजेंद्र कुमार के शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें हैं।

अनंत सिंह के बाद नीलम देवी पर भी गिरी गाज, सरकारी पद से हटाईं गईं

Bihar: पटना, बिहार की राजनीति में अनंत सिंह प्रकरण का असर अब उनके परिवार के दूसरे सदस्य तक पहुंच गया है। जदयू से अनंत सिंह को निष्कासित किए जाने के बाद उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की सदस्यता से हटा दिया गया है। इस फैसले के बाद उन्हें प्राप्त राज्य मंत्री का दर्जा और उससे जुड़ी सुविधाएं भी समाप्त हो जाएंगी। नीलम देवी को इसी वर्ष मई में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति में सदस्य मनोनीत किया गया था। इस समिति के कार्यकारी अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी हैं। समिति में नीलम देवी समेत कुल 14 सदस्य शामिल थे। सदस्यों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था।

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विधान परिषद चुनाव से शुरू हुआ विवाद

नीलम देवी पर हुई कार्रवाई को हालिया विधान परिषद चुनाव के दौरान पैदा हुए राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने चुनाव में जदयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था। उनके इस रुख को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत के तौर पर देखा गया। चुनाव के दौरान अनंत सिंह की ओर से जदयू के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयानबाजी भी की जा रही थी। पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के समर्थन के बजाय दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में खड़े होने और नेतृत्व के खिलाफ लगातार हमलावर रुख अपनाने के बाद जदयू ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।

राजनीतिक विवाद का परिवार पर भी असर

अनंत सिंह के बाद अब नीलम देवी की समिति सदस्यता समाप्त किए जाने से उनके परिवार को राजनीतिक और सरकारी पद के स्तर पर एक और झटका लगा है। समिति से हटाए जाने के बाद राज्य मंत्री का दर्जा और उससे जुड़ी सुविधाएं भी वापस ली जाएंगी। इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में पार्टी अनुशासन से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले के रूप में देखा जा रहा है। विधान परिषद चुनाव के दौरान शुरू हुआ विवाद अब अनंत सिंह परिवार की सरकारी पदों पर मौजूदगी को भी प्रभावित करता दिख रहा है। हालांकि, इस कार्रवाई के पीछे के आधिकारिक कारणों को संबंधित आदेश के आधार पर ही अंतिम रूप से स्पष्ट माना जा सकता है।

इस मामले से संबंधित जानकारी लेने पर चैनपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार पासी के द्वारा बताया गया मारपीट की घटना में दोनों पक्षों से 2 लोग घायल हैं पहले पक्ष से सुगन कुमार एवं दूसरे पक्ष से रमुन बिंद घायल हैं, घायलों को इलाज के लिए चैनपुर सीएचसी में भर्ती करवाया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है आवेदन प्राप्त होने पर मामले में कार्रवाई की जाएगी।

कैमूर में मजदूरी कटौती पर भड़के मनरेगा श्रमिक, कार्यालय का घेराव कर मांगा पूरा भुगतान

Bihar: कैमूर जिले के चांद प्रखंड में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत पौधारोपण कार्य में लगे श्रमिकों की मजदूरी में कथित कटौती को लेकर विवाद गहरा गया है। मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं मिलने से नाराज दर्जनों श्रमिकों ने संबंधित कार्यालय का घेराव कर विरोध जताया। श्रमिकों का आरोप है कि तीन महीने तक मजदूरी का भुगतान लंबित रखने के बाद जब राशि खाते में भेजी गई, तो निर्धारित 300 रुपये प्रतिदिन के बजाय केवल 160 रुपये ही दिए गए। मामला सामने आने के बाद प्रखंड कार्यालय में हलचल मच गई। कार्यक्रम पदाधिकारी रामेश्वर पाठक ने श्रमिकों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और भुगतान संबंधी समस्या को दूर करने का आश्वासन दिया।

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74 श्रमिकों ने उठाई बकाया मजदूरी की मांग

मामला चांद पंचायत सहित आसपास के क्षेत्रों में पौधारोपण कार्य से जुड़ा है। श्रमिकों के अनुसार, चांद, भेरी, किलनी और कोनहरा मौजा में पौधारोपण के तहत काम कराया गया था। इन कार्यों में कुल 74 श्रमिकों के शामिल होने की बात सामने आई है। श्रमिकों ने बताया कि संबंधित क्षेत्रों में करीब 7,400 पौधे लगाए गए हैं। योजना के तहत 100 पौधों की देखभाल के लिए एक वनपोषक को प्रतिदिन 300 रुपये मजदूरी देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद भुगतान के समय मजदूरी की राशि घटाकर खाते में भेजी जा रही है। इससे नाराज श्रमिक पारस साह, बिंदल तेली, कन्हैया राम, रामधार राम, शिवकुमारी देवी, दुलारी देवी सहित अन्य लोगों ने कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।

300 रुपये की जगह 160 रुपये मिलने से नाराजगी

श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित जिम्मेदारी के अनुसार काम किया है, इसलिए उन्हें तय मजदूरी मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि तीन महीने तक भुगतान नहीं हुआ और अब जब राशि खाते में भेजी जा रही है, तो प्रतिदिन 300 रुपये के बजाय केवल 160 रुपये दिए जा रहे हैं। श्रमिकों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें निर्धारित दर के अनुसार पूरी मजदूरी चाहिए। उनका सवाल है कि जब काम पूरा कराया गया है, तो भुगतान में कटौती किस आधार पर की जा रही है।

ओवरसियर पर मनमाने तरीके से मजदूरी घटाने का आरोप

इस मामले में श्रमिकों की ओर से विभागीय ओवरसियर शशि चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मजदूरी भुगतान में अंतर की वजह जानने पर मास्टर रोल तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ पंचायतों में श्रमिकों की मजदूरी कम दर्शाते हुए मास्टर रोल अपलोड किया गया, जिसके कारण उनके खातों में कम राशि पहुंची। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित ओवरसियर का पक्ष सामने आना बाकी है। बताया जा रहा है कि चांद, चौरी, शिवरामपुर और सिरहिरा पंचायतों में श्रमिकों को कम मजदूरी मिलने की शिकायत है, जबकि लोहदन और वयरी पंचायतों में पूरी राशि का भुगतान किए जाने की बात कही गई है। श्रमिकों ने इस अंतर को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

रोजगार सेवक ने भी उठाए सवाल, पीओ ने दिया सुधार का भरोसा

चांद पंचायत के रोजगार सेवक भारती राम जी ने श्रमिकों की मांग को जायज बताते हुए ओवरसियर पर जानबूझकर मजदूरी कम किए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, विकसित भारत जी राम जी के कार्यक्रम पदाधिकारी रामेश्वर पाठक ने मामले में तकनीकी गड़बड़ी होने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि समस्या को सुधारने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में ओवरसियर शशि चौधरी से मोबाइल फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि श्रमिकों की मजदूरी में कटौती किस स्तर पर और किस आधार पर हुई। मामले में मास्टर रोल, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित पंचायतों के आंकड़ों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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