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पुर्व से चले आ रहे विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट दोनों पक्षों से एक-एक घायल

पहला पक्ष

Bihar: कैमूर जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के छोटकी लोहरा एवं गांगोडीह के दो पक्षों के बीच रविवार की सुबह पूर्व से चले आ रहे विवाद को लेकर जमकर मारपीट हुई, मारपीट के दौरान दोनों पक्षों से एक-एक व्यक्ति के घायल हो जाने का मामला सामने आया है, जिन का इलाज चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में चल रहा है।

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दूसरा पक्ष

मारपीट की घटना से संबंधित जानकारी देते हुए ग्राम छोटकी लोहरा के निवासी सुगन कुमार पिता धुरफेंकन बिंद के द्वारा बताया गया रविवार की सुबह 7:30 बजे के करीब यह शौच करने के लिए गांव से पूरब की तरफ खेत में गए थे, उस दौरान पूर्व के विवाद को लेकर रमुन बिंद पिता स्वर्गीय सुरेश बिंद एवं विजेंद्र कुमार पिता रमुन बिंद दोनों के द्वारा घेर कर लाठी डंडे से मारपीट की जाने लगी, जिसमें यह घायल हो गए, मारपीट की सूचना पर मौके पर घर के और अन्य सदस्य पहुंच गए उन लोगों के साथ भी मारपीट की गई है।

सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के दावे पर सियासत, पप्पू यादव के बयान को केंद्र ने बताया भ्रामक

Bihar: बिहार की राजनीति में सीमांचल क्षेत्र को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू  यादव ने दावा किया है कि भविष्य में बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने के बाद सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय

सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पहले पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की रणनीति बनाई जा सकती है। इसके बाद बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर सीमांचल क्षेत्र के साथ पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को जोड़कर एक नया प्रशासनिक ढांचा तैयार करने की योजना पर काम हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित रणनीति के तहत बिहार में सत्ता परिवर्तन और प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं भी चल रही हैं। पप्पू यादव के अनुसार सीमांचल के साथ पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, रायगंज और दिनाजपुर जैसे जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की कोशिश की जा सकती है।

सांसद ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नितीश कुमार को हटाने और किसी पूर्व सैन्य अधिकारी को राज्यपाल बनाए जाने जैसी चर्चाएं भी इसी राजनीतिक योजना का हिस्सा हो सकती हैं। इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल के विधायक रणविजय  साहू ने भी विधानसभा सत्र के दौरान इसी तरह के आरोप लगाए थे। उनका बयान उस समय सामने आया था जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमांचल क्षेत्र का तीन दिवसीय दौरा किया था। उनके दौरे के बाद विपक्षी दलों ने इस तरह की चर्चाओं को हवा दी थी।

हालांकि इन दावों पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से सफाई दी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर कोई नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना केंद्र सरकार के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं और लोगों को गुमराह करने के लिए फैलायी जा रही हैं। नित्यानंद राय ने कहा कि पप्पू यादव के बयान को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है और लोगों को ऐसी अफवाहों से दूर रहना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार की ओर से बिहार और पश्चिम बंगाल के जिलों को मिलाकर किसी नए प्रशासनिक ढांचे या केंद्र शासित प्रदेश बनाने की कोई योजना नहीं है।

वहीं इस मामले में दूसरे पक्ष से रमुन बिंद पिता स्वर्गीय सुरेश बिंद एवं विजेंद्र कुमार पिता रमुन बिंद जिसमें रमन बिंद का मारपीट में सर फटा है, इनके द्वारा बताया गया कि यह अपने खेत में पटवन की लिए तैयारी कर रहे थे, उस दौरान सुगन कुमार पिता धुरफेकन बिंद के द्वारा गाली-गलौज किया जाने लगा और मारपीट की जाने लगी जिसमें इनका सर फट गया जबकि उनके पुत्र विजेंद्र कुमार के शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें हैं।

प्रशांत किशोर का बिहार सरकार पर तीखा हमला, बोले– आर्थिक संकट के बहाने हट सकती है शराबबंदी

Bihar: पटना, जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास कार्यों और नेतृत्व क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले कुछ महीनों में बिहार आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है। प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियों के कारण हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, वहीं ठेकेदारों के भुगतान भी लंबित हैं। उन्होंने इसे “जनता के पैसे से वोट खरीदने” की राजनीति का परिणाम बताया।

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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर विकास कार्य लगभग ठप हो चुके हैं। ठेकेदारों को भुगतान नहीं मिलने के कारण योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ रहा है। राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर किशोर ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगले 3-4 महीनों में बिहार में गंभीर वित्तीय संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार शराबबंदी कानून में ढील देने या उसे हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि सरकार के पास राजस्व बढ़ाने का कोई दूसरा ठोस विकल्प नहीं है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने उनके नेतृत्व को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की मानसिक और शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है और भारतीय जनता पार्टी उनके चेहरे का इस्तेमाल “मुखौटे” के रूप में कर रही है, ताकि जनता को भ्रमित किया जा सके। किशोर के इन बयानों के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है, खासकर तब जब राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज होंगी।
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस मामले से संबंधित जानकारी लेने पर चैनपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार पासी के द्वारा बताया गया मारपीट की घटना में दोनों पक्षों से 2 लोग घायल हैं पहले पक्ष से सुगन कुमार एवं दूसरे पक्ष से रमुन बिंद घायल हैं, घायलों को इलाज के लिए चैनपुर सीएचसी में भर्ती करवाया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है आवेदन प्राप्त होने पर मामले में कार्रवाई की जाएगी।

कैमूर में फसल क्षतिपूर्ति आवेदन निरस्त होने पर किसानों का विरोध, सुधार की मांग तेज

Bihar: कैमूर जिले के चांद प्रखंड में बाढ़ और बे मौसम बारिश से प्रभावित फसलों के लिए दी जाने वाली क्षतिपूर्ति इनपुट राशि के आवेदन निरस्त किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में किसानों ने एकत्र होकर आंदोलन तेज करने तथा न्यायालय की शरण लेने पर विचार किया। जानकारी के अनुसार फसल क्षतिपूर्ति इनपुट राशि के लिए किए गए 1536 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। इससे नाराज़ किसानों ने भारतीय किसान मजदूर यूनियन कैमूर के बैनर तले प्रखंड मुख्यालय में बैठक की। 

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बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि जिन भूमि धारकों के नाम से जमाबंदी दर्ज है, उनके वंशजों द्वारा किए गए आवेदन भी बिना सुधार का अवसर दिए निरस्त कर दिए गए। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर एक सप्ताह के भीतर निरस्त आवेदनों को संशोधित करने के लिए सुधार हेतु व्यवस्था खोलने की मांग की गई। किसानों का कहना था कि वे सभी वास्तविक भूमि धारक हैं और उनकी धान सहित अन्य फसलें बाढ़ व असमय वर्षा से बर्बाद हुई हैं। ऐसे में उन्हें क्षतिपूर्ति राशि से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। जिलाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने कहा कि बिना सुधार का अवसर दिए आवेदनों को निरस्त करना उचित नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि शीघ्र सुधार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि 1536 किसानों को क्षतिपूर्ति राशि नहीं दी गई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। बैठक को संबोधित करते हुए किसान नेता अर्जुन सिंह कुशवाहा ने कहा कि प्रखंड में बाढ़ और बे मौसम बारिश से बड़ी मात्रा में धान की फसल नष्ट हुई थी। किसानों को आवेदन के लिए बहुत कम समय मिला, जिसके कारण जल्दबाजी में त्रुटियां हो गईं। उन्होंने सुधार का अवसर देने और क्षतिपूर्ति वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। बैठक के बाद किसानों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निरस्त आवेदनों में सुधार का अवसर देने तथा क्षतिपूर्ति वितरण प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। सभा में सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।

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