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इसी दौरान बिल से निकले एक विषैले सांप ने उन्हें काट लिया। शुरुआत में उन्हें इसकी गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और मुंह से झाग निकलने लगा। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के एक ओझा के पास झाड़फूंक कराने पहुंच गए। करीब तीन घंटे तक पारंपरिक तरीके से उपचार कराया गया, लेकिन उनकी हालत लगातार नाजुक होती चली गई।
स्थिति गंभीर होने पर परिजन उन्हें लेकर सदर अस्पताल भभुआ पहुंचे, जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सांप काटने के तुरंत बाद मरीज को अस्पताल लाकर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन दिया जाता, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। चिकित्सा विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में समय बर्बाद न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतक अपने पीछे पत्नी कृष्णवती देवी और चार बेटियों का परिवार छोड़ गए हैं। सबसे छोटी बेटी की शादी अभी बाकी है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।