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प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जनगणना के पहले चरण में मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक प्रगणक को अपने निर्धारित क्षेत्र में जाकर “नजरी नक्शा” तैयार करना अनिवार्य होगा। इस नक्शे के माध्यम से क्षेत्र के सभी मकानों की पहचान के साथ यह भी दर्ज किया जाएगा कि मकान आवासीय, व्यावसायिक या अन्य उपयोग में है। प्रशिक्षक मनोज कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि नजरी नक्शा जनगणना का आधार है और इसके बिना आगे की प्रक्रिया संभव नहीं है। उन्होंने निर्देश दिया कि नक्शा बनाने की शुरुआत उत्तर-पश्चिम दिशा से करते हुए दक्षिण-पूर्व दिशा में समाप्त की जाए। साथ ही नक्शे में नहर, तालाब, मंदिर, स्कूल जैसे प्रमुख स्थलों को भी चिह्नित करना जरूरी होगा।
इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए डेटा संग्रह करेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी। सरकार ने “स्व-गणना” का विकल्प भी दिया है, जिसके तहत नागरिक स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। स्व-गणना के बाद प्रत्येक परिवार को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा। सत्यापन के दौरान प्रगणक इस आईडी के माध्यम से विवरण की पुष्टि करेंगे। प्रशिक्षण में संभावित समस्याओं और उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की जा रही है, ताकि जनगणना कार्य को बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।