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रामगढ़ विधानसभा चुनाव पर हाईकोर्ट की नजर, स्ट्रांग रूम खुलने से सियासी सरगर्मी तेज, 30 वोटों के मामूली अंतर से हुआ था हार-जीत का फैसला

रामगढ़ विधानसभा चुनाव: हाईकोर्ट के निर्देश पर खुला स्ट्रांग रूम, बढ़ी सियासी हलचल

Bihar: कैमूर जिले की 203 रामगढ़ विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव में महज 30 वोटों के अंतर से हार-जीत का फैसला होने के बाद उठे विवाद पर अब हाईकोर्ट के निर्देश के तहत आगे की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंगलवार को जिला प्रशासन की मौजूदगी में विधानसभा चुनाव के स्ट्रांग रूम का ताला खोला गया। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। स्ट्रांग रूम खोले जाने के बाद संबंधित चुनावी दस्तावेजों को एकत्रित कर सीलबंद किया गया। इन दस्तावेजों को न्यायालय के निर्देश के अनुसार जांच के लिए प्रस्तुत किया जाना है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव परिणाम को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।

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30 वोटों से तय हुई थी जीत-हार

रामगढ़ विधानसभा चुनाव के परिणाम में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी सतीश कुमार उर्फ पिंटू यादव ने भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह को 30 मतों से पराजित किया था। घोषित परिणाम के अनुसार, बसपा प्रत्याशी को 72,689 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी के खाते में 72,659 मत आए थे। इतने कम अंतर से आए परिणाम के बाद पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती की मांग उठी थी। भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह ने चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब इसी मामले में न्यायालय की प्रक्रिया के तहत चुनाव से संबंधित रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं।

पोस्टल बैलेट और विदेश में रहने वाले मतदाताओं के वोट पर भी नजर

चुनावी विवाद में पोस्टल बैलेट की गिनती के साथ विदेश में रहने वाले मतदाताओं के मतदान से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं। न्यायालय ने जिला प्रशासन से 21 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इसी के तहत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में आवश्यक दस्तावेज संकलित किए गए। बताया गया कि भभुआ में रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से संबंधित स्ट्रांग रूम करीब तीन घंटे तक खोला गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेजों को सीलबंद कर दिया गया, ताकि उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सके।

29 अक्टूबर तक रिपोर्ट पेश करने की तैयारी

हाईकोर्ट के निर्देश के आलोक में जिला प्रशासन को 29 अक्टूबर तक संबंधित रिपोर्ट और दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत करने हैं। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर न्यायालय का रुख महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, स्ट्रांग रूम खोले जाने की कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, दोबारा मतगणना होगी या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। अब सभी की निगाहें न्यायालय में पेश होने वाली रिपोर्ट और आगामी आदेश पर टिकी हैं।

 

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