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नियुक्ति पर उठे सवाल, आरटीआई से भी मांगी गई जानकारी
सीडीपीओ के अनुसार, सेविका की नियुक्ति को लेकर उनके पट्टीदार ने जिला स्तर से लेकर प्रखंड के आईसीडीएस कार्यालय तक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की गई थी। इस संबंध में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत भी जानकारी मांगी गई थी। मामले के सामने आने के बाद वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर सेविका के वेतन भुगतान पर भी रोक लगाई गई थी।
जांच में नहीं मिला प्रमाण पत्र जारी करने वाले संस्थान का पता
शिकायत में दावा किया गया था कि नियुक्ति के लिए प्रस्तुत प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश के दतिया स्थित कथित ‘करसदेव डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन’ नामक संस्थान से संबंधित है, जबकि इसकी संबद्धता उत्तर प्रदेश से बताई गई थी। सीडीपीओ प्रिया कुमारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर कराई गई जांच में संबंधित संस्थान का कोई पता नहीं मिला। मामले की पुष्टि के लिए कार्यालय के कर्मचारियों ने विशेष दूत के माध्यम से तथा सेविका के साथ जाकर भी संस्थान की जानकारी जुटाने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त भौतिक और जियो-टैग सत्यापन भी कराया गया, लेकिन संबंधित संस्था का अस्तित्व सामने नहीं आया।
बर्खास्तगी पर अंतिम फैसला वरीय अधिकारियों के स्तर से
सीडीपीओ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रमाण पत्र को संदिग्ध पाए जाने के बाद आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट जिला कार्यालय भेज दी गई है। अब वरीय अधिकारियों से मिलने वाले मार्गदर्शन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। फिलहाल, मेड़ा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 को नजदीकी दूसरे आंगनबाड़ी केंद्र से टैग कर संचालित किया जा रहा है। सीडीपीओ ने बताया कि पर्यवेक्षिका को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। विभागीय निर्णय आने तक केंद्र का संचालन इसी व्यवस्था के तहत किया जाएगा।