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मलिकसराय में मां काली की पूजा का आयोजन प्रत्येक दो वर्ष के अंतराल पर किया जाता है। इस पूजा की सबसे खास विशेषता यह है कि यहां पारंपरिक रूप से किसी जीव की वास्तविक बलि नहीं दी जाती। पूजा में शामिल होने के लिए गांव के लोगों के अलावा दूर-दराज में रहने वाले रिश्तेदार भी अपने पैतृक गांव पहुंचे। धार्मिक आयोजन के तहत मंगलवार को ग्रामीण एकजुट होकर पूरे गांव की सामूहिक परिक्रमा करते हुए गांव के बाहर स्थित मां काली के मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं ने मां काली के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
पूजा के दौरान मां मुंडेश्वरी मंदिर की परंपरा से प्रेरित रक्तविहीन प्रतीकात्मक रस्म भी निभाई गई। इस दौरान भेड़ और बकरे की प्रतीकात्मक बलि की धार्मिक परंपरा पूरी की गई।
पूजा के साथ गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मां काली के जयघोष से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए तथा श्रद्धालुओं ने मां काली का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।