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कैमूर में विरासत बचाने की मुहिम: प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन के लिए प्रशासन आगे आया

कैमूर में प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन शुरू | ज्ञान भारत मिशन के तहत बड़ी पहल

Bihar: कैमूर जिले की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक अहम पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत कैमूर में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान कर उनका डिजिटाइजेशन किया जाएगा, जिससे इनकी डिजिटल रूप में स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह पूरी प्रक्रिया भारत सरकार के “ज्ञान भारत मिशन” के अंतर्गत संचालित की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले में बिखरी हुई ऐतिहासिक पांडुलिपियों को एक मंच पर लाकर उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जाए।

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जिला पदाधिकारी के निर्देश पर इस कार्य को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न संस्थानों—जैसे मंदिर, मठ, पुस्तकालय, शैक्षणिक संस्थान और निजी संग्रह—में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वे करेगी और उनकी सूची तैयार करेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के पास पांडुलिपियां हैं, उनका स्वामित्व पूरी तरह उनके पास ही रहेगा। केवल उनकी जानकारी और डिजिटल कॉपी “ज्ञान भारतम्” मोबाइल ऐप पर अपलोड की जाएगी, जिसमें संग्रहकर्ता का नाम, पता और संपर्क विवरण भी दर्ज किया जाएगा। इस अभियान में उन पांडुलिपियों को शामिल किया जाएगा जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हैं और जो कागज, भोजपत्र, ताम्रपत्र, कपड़ा या अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी गई हैं। इन दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर उन्हें एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

जिला प्रशासन ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और लोगों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करें। इसके साथ ही, ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान भी की जाएगी जिनके पास महत्वपूर्ण पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर बैठकें और विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।
जिला पदाधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई भी पुरानी पांडुलिपि है, तो उसकी जानकारी लिच्छवि भवन स्थित कला एवं संस्कृति विभाग के कार्यालय में दें या स्वयं “ज्ञान भारतम्” मोबाइल ऐप के माध्यम से अपलोड करें, ताकि इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

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