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स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में डंफर बाजार से गुजर रहे हैं, जिनमें क्षमता से अधिक मिट्टी लदी होती है। चलते समय मिट्टी सड़क पर गिरती रहती है, जो बाद में धूल बनकर पूरे इलाके में फैल जाती है। इससे दुकानदारों और राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। बाजार के लोगों—भरत सोनी, डिंपल जायसवाल और पवन जायसवाल—ने बताया कि शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक 300 से ज्यादा डंफर गुजरते हैं। हालांकि धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है, लेकिन वह कुछ ही देर में बेअसर हो जाता है।
सड़कें टूटीं, प्रशासन मौन
क्षमता से अधिक लोड के कारण सड़कें जगह-जगह फट चुकी हैं और किनारे भी टूटने लगे हैं। हाटा बाजार की मुख्य सड़क तो पूरी तरह गड्ढों में बदल गई है। इसके बावजूद परिवहन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि छोटी गाड़ियों पर ओवरलोडिंग को लेकर अक्सर जुर्माना लगाया जाता है।
नियमों की उड़ रही धज्जियां
जिला प्रशासन ने पहले ही तय किया था कि डंफरों का आवागमन रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक ही होगा, ताकि जाम और प्रदूषण से राहत मिल सके। लेकिन हकीकत यह है कि शाम 6 बजे से ही डंफरों की आवाजाही शुरू हो जाती है, जिससे बाजार में जाम की स्थिति बन जाती है। नगर पंचायत हाटा के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल ने बताया कि ओवरलोडिंग और लापरवाही के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सतौना नहर के पास गार्ड तैनात किए जाएं, तय समय से पहले डंफरों की एंट्री रोकी जाए और वाहनों में मिट्टी को ढककर ले जाना अनिवार्य किया जाए। इस संबंध में परिवहन विभाग से पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन संबंधित अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका, फिलहाल हालात यह हैं कि विकास कार्य के नाम पर स्थानीय लोग धूल, जाम और खराब सड़कों की मार झेलने को मजबूर हैं।