Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

बताया गया कि औद्योगिक पार्क के लिए गेंहुआ, कुतवनपुर, करजी, कुरई और मोरवा गांव की करीब 781 एकड़ जमीन अधिग्रहित किए जाने की योजना है। किसानों का कहना है कि यह भूमि उपजाऊ और सिंचित है तथा बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका इसी जमीन पर निर्भर है। बैठक में भारतीय किसान मजदूर यूनियन कैमूर के जिलाध्यक्ष ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसान जिस तरह अपनी आवाज उठा रहे हैं, यूनियन पूरी तरह उनके साथ है। उन्होंने कहा कि पांचों गांवों की जमीन के अधिग्रहण का विरोध किया जाएगा।
किसानों ने सरकार के सामने वैकल्पिक स्थान का प्रस्ताव भी रखा। बैठक में शामिल अशोक कुमार, राकेश उपाध्याय और सुरेंद्र राम समेत अन्य किसानों ने कहा कि अधौरा और चैनपुर क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ खाली एवं परती जमीन उपलब्ध है। सरकार को कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण करने के बजाय इन स्थानों पर औद्योगिक पार्क के निर्माण पर विचार करना चाहिए।
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित क्षेत्र की जमीन काफी उपजाऊ और सिंचित है। उनका दावा है कि भूमि अधिग्रहण होने की स्थिति में खेती पर निर्भर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। किसानों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी आजीविका का आधार रही पुश्तैनी जमीन को अधिग्रहित नहीं होने देंगे। बैठक के दौरान किसानों ने भूमि अधिग्रहण के विरोध में लगातार जनसंपर्क और बैठकें आयोजित करने के साथ प्रशासन को असहमति पत्र सौंपने की बात भी कही। किसानों के तेवर से स्पष्ट है कि प्रस्तावित औद्योगिक पार्क को लेकर आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है।