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जानकारी के अनुसार, मेढ़ पैक्स के पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर बिंद और प्रबंधक साधू सिंह के कार्यकाल के दौरान 15 नवंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 के बीच कुल 49 किसानों से 4233 क्विंटल धान की खरीद की गई थी। अधिप्राप्त धान में से करीब 1160 क्विंटल धान से चावल तैयार कर एसएफसी को सौंप दिया गया, जबकि शेष 2966.25 क्विंटल धान पैक्स के गोदाम में स्टॉक के रूप में दर्ज किया गया था। इसी बीच पैक्स का चुनाव हुआ और पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर बिंद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए अध्यक्ष का निर्वाचन हुआ। नए अध्यक्ष को जब पैक्स का कार्यभार और उपलब्ध स्टॉक सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई तो गोदाम में रखे धान को लेकर मामला उलझ गया। बताया गया है कि पैक्स प्रबंधक साधू सिंह ने लिखित रूप से गोदाम में 2966.25 क्विंटल धान मौजूद होने की पुष्टि की थी। लेकिन नए अध्यक्ष को स्टॉक सौंपने की बारी आई तो पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक द्वारा लगातार मामले को टालने का आरोप है।
इसके बाद प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी द्वारा गोदाम का भौतिक सत्यापन करने का प्रयास किया गया। आरोप है कि जांच के दौरान कई तरह के बहाने बनाकर गोदाम की जांच में बाधा डाली गई। बाद में किसी तरह गोदाम की जांच कराई गई तो वहां एक भी क्विंटल धान मौजूद नहीं मिला। गोदाम खाली मिलने के बाद संबंधित पूर्व पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक को धान अथवा उससे तैयार चावल समिति में जमा करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया। निर्धारित समय बीतने के बावजूद न तो धान जमा किया गया और न ही उसके बदले चावल समिति को सौंपा गया। आवेदन में कहा गया है कि इससे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि पूर्व पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक द्वारा आपसी मिलीभगत से प्रशासन को गलत जानकारी देते हुए गोदाम में दर्ज धान को गायब कर दिया गया। 2966.25 क्विंटल धान की कीमत बोरा सहित 2394 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करीब 71,12,202.50 रुपये आंकी गई है। इस संबंध में चैनपुर थानाध्यक्ष विजय प्रसाद ने बताया कि 71 लाख रुपये से अधिक मूल्य के धान के गबन से संबंधित आवेदन प्राप्त हुआ है। आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और आरोपों की जांच कर आगे की कार्रवाई कर रही है।