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पंचायत सरकार भवन में घुसा बाढ़ का पानी
अंकोढ़ी गांव में भी स्थिति लगातार बिगड़ रही है। काली स्थान के समीप स्थित पंचायत सरकार भवन में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। अंकोढ़ी-तेनुआं-सदुल्लहपुर मार्ग पर करीब चार फीट पानी बह रहा है, जिससे सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है। रामगढ़-देवहलिया पथ से कान्हीं जाने वाली सड़क भी पानी में डूब गई है। ग्रामीण अब जमुरना के रास्ते आवागमन करने को मजबूर हैं। वहीं तेनुआं-सदुल्लहपुर का सड़क संपर्क टूटने के बाद लोग डरवन की ओर से आवाजाही कर रहे हैं।
रामगढ़-बड़ौरा मार्ग पर भी आवागमन बंद
कर्मनाशा नदी के बढ़ते जलस्तर ने रामगढ़-बड़ौरा-दिलदारनगर पथ को भी प्रभावित किया है। सिद्धनाथ बाबा के समीप सड़क पर पानी बढ़ने से वाहनों का परिचालन ठप हो गया है। रामगढ़-बड़ौरा से उत्तर प्रदेश का सीधा संपर्क भी प्रभावित हुआ है। ग्रामीण अब नाव के सहारे दिलदारनगर की ओर से आवाजाही कर रहे हैं। भिरखिरा-बरहिया मार्ग पर भी पानी का बहाव तेज है। यहां ग्रामीणों के लिए नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। कलानी-चंडेश पथ के छलका पर भी पानी बह रहा है।
खेतों में खड़ी धान और भदई फसल बर्बाद होने की कगार पर
बाढ़ के पानी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रामगढ़ के निचले इलाकों में सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल डूब गई है। पनसेरवां, बरहिया और भटौली गांवों के सिवाना में लगी धान की फसल भी पानी की चपेट में आ गई है। गोड़सरा निवासी योगेंद्र कुशवाहा की करीब 45 बीघा में लगी सोनाचूर धान की फसल भी बाढ़ के पानी से डूबने की स्थिति में पहुंच गई है।
धान के अलावा उड़द, मूंग और अरहर जैसी भदई फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। पशुओं के चारे के लिए लगाए गए जिनोरा और बाजरा की फसल भी पानी में डूब गई है।
एक हजार हेक्टेयर से अधिक सब्जी की फसल पर संकट
बाढ़ से सबसे बड़ा नुकसान सब्जी उत्पादक किसानों को हुआ है। तीनों नदियों के आसपास के क्षेत्रों में एक हजार हेक्टेयर से अधिक खेतों में लगी सब्जी की फसल पानी में डूब गई है। किसानों का कहना है कि पानी में डूबने के बाद अधिकांश सब्जी की फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है। भटौली गांव के किसान कन्हैया कुशवाहा, रामबिलास चौधरी और अक्षय कुमार ने बताया कि खेतों में लगी विभिन्न प्रकार की सब्जियां बाढ़ के पानी में डूब गई हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं सब्जी की आवक प्रभावित होने से बाजार में कीमतें बढ़ने के संकेत भी मिलने लगे हैं। बाढ़ के कारण आने वाले दिनों में पशुओं के चारे का संकट भी गहरा सकता है। किसानों का कहना है कि यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो नुकसान का दायरा और बढ़ जाएगा।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों का लिया जायजा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी, बीडीओ विकास कुमार सिंह और सीओ निकेश कुमार ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, आंटडीह गांव में बाढ़ के पानी से घिरे आठ घरों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। उनके लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदियों के जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई तो आने वाले समय में और कई गांवों का सड़क संपर्क टूट सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले करीब 48 घंटे से क्षेत्र में बारिश नहीं हुई है। इसके बावजूद तीनों नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यदि पानी में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा तो मुख्य मार्ग एनएच-319ए भी बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है। फिलहाल रामगढ़ के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासन से लगातार राहत एवं बचाव की तैयारी मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।



