Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
निरीक्षण के दौरान जीटी रोड (एनएच-19) के दक्षिणी हिस्से में स्थित अन्नपूर्णा फैमिली रेस्टोरेंट में एक बाल श्रमिक काम करता हुआ मिला। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाल श्रमिक को कार्य से मुक्त कराया। बताया गया कि मुक्त कराया गया बाल श्रमिक मोहनियां प्रखंड क्षेत्र का ही निवासी है। कार्रवाई के बाद बाल श्रमिक को आवश्यक प्रक्रिया के तहत दादर स्थित बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। वहीं, होटल संचालक के विरुद्ध बाल श्रम कानून के तहत मोहनियां थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
श्रम अधीक्षक ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम कराना अपराध है। वहीं, 14 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों से जोखिमपूर्ण कार्य कराना भी कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रत्येक विमुक्त बाल श्रमिक के मामले में 20 हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मुक्त कराए गए बाल श्रमिक को तीन हजार रुपये तत्काल सहायता राशि प्रदान की जाती है। इस अभियान में दुर्गावती के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अजितेश कुमार तिवारी, अभिमन्यु कुमार सहित श्रम संसाधन विभाग एवं पुलिस के अन्य कर्मी शामिल रहे।



