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इतना ही नहीं, योजना के नाम पर 1 लाख 45 हजार 920 रुपये की निकासी भी कर ली गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले की जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी सावन कुमार को आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी। जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि परियोजना की लागत वास्तविक आवश्यकता से कई गुना अधिक दर्शाकर सरकारी राशि के दुरुपयोग की कोशिश की गई।
सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने संबंधित मनरेगा पीआरएस और जेई के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को दिया था। हालांकि, लगभग दो वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी कर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। कार्रवाई में हो रही देरी से नाराज शिकायतकर्ता सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह को पुनः आवेदन सौंपा। उन्होंने मनरेगा योजना में कथित फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है और शिकायतकर्ता को कार्रवाई का इंतजार है।