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पीड़ित संतोष कुमार रावत
संतोष कुमार के अनुसार, उन्होंने लगभग पांच घंटे तक वायरिंग और इन्वर्टर की जांच की। उनका कहना है कि इन्वर्टर के इनपुट में खराबी थी, जिसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो रही थी। काम पूरा होने के बाद जब उन्होंने मेहनताना मांगा, तो उन पर पैसे और गहने चोरी करने का आरोप लगा दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें एक कमरे में बंद कर लाठी-डंडों से मारपीट की गई और थाने में झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भी महिला थाना और एससी-एसटी थाना के पुलिसकर्मियों के यहां बिजली संबंधी कार्य करते रहे हैं।
कर्मचारियों का प्रदर्शन
घटना की जानकारी मिलते ही नगर परिषद भभुआ के सभापति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में सफाईकर्मी महिला थाना पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि थाने के भीतर एक कर्मचारी के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कर्मचारियों ने संबंधित महिला दरोगा के तत्काल निलंबन और निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर नगर परिषद कर्मी प्रशासनिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला और भभुआ के एसडीपीओ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
कई सवाल खड़े
यह घटना पुलिस-जन संबंधों पर कई सवाल खड़े कर रही है। क्या मजदूरी मांगना विवाद का कारण बन सकता है? यदि आरोप असत्य साबित होते हैं तो क्या संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई होगी? थानों के भीतर आम नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? फिलहाल पूरे जिले की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला विभागीय स्तर पर गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है। नगर परिषद कर्मियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि न्याय नहीं मिलने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।