Bihar: कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के मलिक सराय में बिहार राज्य लोहार महासभा कैमूर के तत्वधान में विश्वकर्मा मंदिर का 83 वां वार्षिकोत्सव स्थापना दिवस मनाया गया, जिस के मुख्य अतिथि चैनपुर के विधायक सा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बिहार सरकार मोहम्मद रमाकांत रहे साथ में बिहार के पूर्व मंत्री सह अनुसूचित जाति जनजाति आयोग अध्यक्ष बिहार सरकार के संतोष कुमार निराला रहे, आयोजित स्थापना दिवस पर लोहार समाज के उत्थान को लेकर वक्ताओं के द्वारा अपने मंतव्य दिए गए, मौके पर समाजसेवी रमेश जायसवाल भी रहे।
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के पर मौजूद वक्ताओं के द्वारा लोगों को संबोधित करते हुए कहा गया, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लोहार जाति को अनुसूचित जनजाति से वंचित करने का एकपक्षीय फैसला घोर निंदनीय है, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व के निर्णय को अनदेखी करते हुए कुछ लोगों के व्यक्तिगत निर्णय को मुख्य बिंदु मानते हुए इस तरह का निर्णय देना सरासर गलत है, और असंवैधानिक है, सहित कई बातें कही गई, लोहार समाज के द्वारा बिहार सरकार से मांग करते हुए कहा गया न्यायालय द्वारा पारित निर्णय को तत्काल रोक लगाने के लिए यथोचित कार्रवाई की जाए ताकि इस समुदाय का विकास हो सके।
अनंत सिंह के बाद नीलम देवी पर भी गिरी गाज, सरकारी पद से हटाईं गईं
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विधान परिषद चुनाव से शुरू हुआ विवाद
नीलम देवी पर हुई कार्रवाई को हालिया विधान परिषद चुनाव के दौरान पैदा हुए राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने चुनाव में जदयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था। उनके इस रुख को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत के तौर पर देखा गया। चुनाव के दौरान अनंत सिंह की ओर से जदयू के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयानबाजी भी की जा रही थी। पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के समर्थन के बजाय दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में खड़े होने और नेतृत्व के खिलाफ लगातार हमलावर रुख अपनाने के बाद जदयू ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
राजनीतिक विवाद का परिवार पर भी असर
अनंत सिंह के बाद अब नीलम देवी की समिति सदस्यता समाप्त किए जाने से उनके परिवार को राजनीतिक और सरकारी पद के स्तर पर एक और झटका लगा है। समिति से हटाए जाने के बाद राज्य मंत्री का दर्जा और उससे जुड़ी सुविधाएं भी वापस ली जाएंगी। इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में पार्टी अनुशासन से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले के रूप में देखा जा रहा है। विधान परिषद चुनाव के दौरान शुरू हुआ विवाद अब अनंत सिंह परिवार की सरकारी पदों पर मौजूदगी को भी प्रभावित करता दिख रहा है। हालांकि, इस कार्रवाई के पीछे के आधिकारिक कारणों को संबंधित आदेश के आधार पर ही अंतिम रूप से स्पष्ट माना जा सकता है।
वही अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान के द्वारा लोगों को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया, लोहार समाज के उत्थान के लिए सरकार से इनके द्वारा बात की जाएगी, इस मौके पर हरिहर शर्मा, जगन्नाथ शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष राम चेला शर्मा, जिला अध्यक्ष राम सिंहासन शर्मा, लोजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्रीकांत विश्वकर्मा, शिवकुमार शर्मा सहित अन्य लोहार समाज के लोग उपस्थित रहे।
कैमूर में मजदूरी कटौती पर भड़के मनरेगा श्रमिक, कार्यालय का घेराव कर मांगा पूरा भुगतान
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74 श्रमिकों ने उठाई बकाया मजदूरी की मांग
मामला चांद पंचायत सहित आसपास के क्षेत्रों में पौधारोपण कार्य से जुड़ा है। श्रमिकों के अनुसार, चांद, भेरी, किलनी और कोनहरा मौजा में पौधारोपण के तहत काम कराया गया था। इन कार्यों में कुल 74 श्रमिकों के शामिल होने की बात सामने आई है। श्रमिकों ने बताया कि संबंधित क्षेत्रों में करीब 7,400 पौधे लगाए गए हैं। योजना के तहत 100 पौधों की देखभाल के लिए एक वनपोषक को प्रतिदिन 300 रुपये मजदूरी देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद भुगतान के समय मजदूरी की राशि घटाकर खाते में भेजी जा रही है। इससे नाराज श्रमिक पारस साह, बिंदल तेली, कन्हैया राम, रामधार राम, शिवकुमारी देवी, दुलारी देवी सहित अन्य लोगों ने कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।
300 रुपये की जगह 160 रुपये मिलने से नाराजगी
श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित जिम्मेदारी के अनुसार काम किया है, इसलिए उन्हें तय मजदूरी मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि तीन महीने तक भुगतान नहीं हुआ और अब जब राशि खाते में भेजी जा रही है, तो प्रतिदिन 300 रुपये के बजाय केवल 160 रुपये दिए जा रहे हैं। श्रमिकों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें निर्धारित दर के अनुसार पूरी मजदूरी चाहिए। उनका सवाल है कि जब काम पूरा कराया गया है, तो भुगतान में कटौती किस आधार पर की जा रही है।
ओवरसियर पर मनमाने तरीके से मजदूरी घटाने का आरोप
इस मामले में श्रमिकों की ओर से विभागीय ओवरसियर शशि चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मजदूरी भुगतान में अंतर की वजह जानने पर मास्टर रोल तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ पंचायतों में श्रमिकों की मजदूरी कम दर्शाते हुए मास्टर रोल अपलोड किया गया, जिसके कारण उनके खातों में कम राशि पहुंची। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित ओवरसियर का पक्ष सामने आना बाकी है। बताया जा रहा है कि चांद, चौरी, शिवरामपुर और सिरहिरा पंचायतों में श्रमिकों को कम मजदूरी मिलने की शिकायत है, जबकि लोहदन और वयरी पंचायतों में पूरी राशि का भुगतान किए जाने की बात कही गई है। श्रमिकों ने इस अंतर को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
रोजगार सेवक ने भी उठाए सवाल, पीओ ने दिया सुधार का भरोसा
चांद पंचायत के रोजगार सेवक भारती राम जी ने श्रमिकों की मांग को जायज बताते हुए ओवरसियर पर जानबूझकर मजदूरी कम किए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, विकसित भारत जी राम जी के कार्यक्रम पदाधिकारी रामेश्वर पाठक ने मामले में तकनीकी गड़बड़ी होने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि समस्या को सुधारने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में ओवरसियर शशि चौधरी से मोबाइल फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि श्रमिकों की मजदूरी में कटौती किस स्तर पर और किस आधार पर हुई। मामले में मास्टर रोल, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित पंचायतों के आंकड़ों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





