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परिजनों के मुताबिक, सुबह करीब 3 बजे सुमन को जहरीले सांप ने काट लिया। सर्पदंश की जानकारी मिलने के बाद उसे अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन झाड़फूंक कराने के लिए भरारी चले गए। वहां झाड़फूंक के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह करीब 11 बजे परिजन गंभीर हालत में सुमन को भभुआ सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सक साहिल राज की देखरेख में उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों को सौंप दिया। सुमन के परिजनों ने बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से आपदा के तहत मिलने वाली सहायता राशि उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसी बीच चैनपुर थाना क्षेत्र के करकटगढ़ गांव में भी सर्पदंश का एक मामला सामने आया है। खेत में काम करने के दौरान एक युवक को जहरीले सांप ने डस लिया। घटना के बाद परिजन बिना समय गंवाए उसे इलाज के लिए भभुआ सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सकों ने युवक को भर्ती कर इलाज शुरू किया। समय पर अस्पताल पहुंचने और उपचार मिलने के कारण फिलहाल युवक की हालत में सुधार बताया जा रहा है। कैमूर में सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है। इसके बावजूद कई मामलों में लोग झाड़फूंक और अंधविश्वास के चलते इलाज में देरी कर देते हैं, जिसका खामियाजा मरीज को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ता है।
सर्पदंश की स्थिति में मरीज को झाड़फूंक के लिए ले जाने के बजाय बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है। समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलने से सर्पदंश के मरीज की जान बचाई जा सकती है।