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पुलिस के अनुसार, 10 मई को मोहनिया-रामगढ़ मार्ग स्थित दुर्गावती नदी पुल के नीचे दो सूटकेस से मानव अंग बरामद हुए थे। मामला अभी जांच में ही था कि 12 मई को अभयदेय गांव के पास नहर किनारे दो बोरों में फिर कटे हुए शव के टुकड़े मिले। जांच में पता चला कि सभी अंग एक ही परिवार के चार सदस्यों के थे। तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर गठित एसआईटी ने मृतक के छोटे भाई विकास गुप्ता को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपने भाई, भाभी और दोनों बच्चों की हत्या की बात कबूल कर ली। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने दो शवों के सिर, हत्या में इस्तेमाल चाकू, एक देसी कट्टा, तीन कारतूस, लोहे का फाइटर और शव ठिकाने लगाने में प्रयुक्त स्कूटी बरामद की है। एसपी ने बताया कि परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था।
आरोप है कि कृष्ण मुरारी का अपने भाइयों और मां से अक्सर झगड़ा होता था। 5 मई को मां के साथ हुए विवाद के बाद महाराष्ट्र में काम कर रहे छोटे बेटे विकास गुप्ता को घर बुलाया गया। उसी दौरान उसने हत्या की साजिश रची और अपने साथी दीपक राजपूत के साथ गांव पहुंचा। पुलिस के मुताबिक, 7 मई को विकास गुप्ता, राहुल उर्फ गौतम और दीपक राजपूत ने मिलकर कृष्ण मुरारी की चाकू मारकर हत्या कर दी। वारदात देखने के बाद जब उनकी पत्नी भागने लगी तो आरोपियों ने उसे भी पकड़कर मार डाला। बाद में स्कूल से लौटे दोनों मासूम बच्चों को भी इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया ताकि घटना का कोई गवाह न बच सके। जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या के दौरान मृतक की मां और विकास गुप्ता की पत्नी घर में मौजूद थीं। वारदात के बाद शवों के 18 टुकड़े कर उन्हें सूटकेस और बोरों में भरकर अलग-अलग स्थानों पर फेंका गया। फिलहाल पुलिस इस जघन्य हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।