कैमूर (भभुआ): बिहार राज्य किसान सभा एवं बिहार राज्य खेतिहर मजदूर यूनियन संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को भभुआ जिला मुख्यालय स्थित लिच्छवी भवन के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। यह धरना राष्ट्रीय मांग दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और खेतिहर मजदूर शामिल हुए।
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धरना-प्रदर्शन की संयुक्त अध्यक्षता बृजेश कुमार सिंह और कपिल देव शर्मा ने की। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। खेतिहर मजदूर यूनियन के राज्य संयुक्त सचिव रंगलाल पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि आज़ादी के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक मजदूरों के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि एक ओर चार लेबर कोड लागू कर फैक्ट्रियों में मजदूरों को शोषण का शिकार बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा को कमजोर कर नए कानूनों के माध्यम से ग्रामीण मजदूरों को बड़े जमींदारों के सामने नतमस्तक होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा डॉ. बंदोपाध्याय आयोग को लागू नहीं किए जाने के कारण गरीब और भूमिहीन लोग आज भी आवास से वंचित हैं। साथ ही उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के “बुलडोजर राज” को गरीबों पर अत्याचार बताया।
वहीं किसान सभा के जिला मंत्री भीम सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट घरानों का करीब 15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया, लेकिन किसानों और अन्नदाताओं की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने बीज विधेयक 2025 और बिजली कानून 2025 को किसान-विरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन के बाद संगठन के एक शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर 10 सूत्री मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र में प्रमुख रूप से डॉ. वंद्योपाध्याय आयोग को लागू करने, एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने, चारों लेबर कोड वापस लेने, बीज विधेयक 2025 और बिजली कानून 2025 को रद्द करने, भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन देने तथा बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग शामिल है।
धरना-प्रदर्शन में बलदाऊ सिंह, हरि नारायण पांडेय, राम आशीष यादव, शिव आधार बिंद, ललिता देवी, आशा देवी सहित कई किसान एवं खेतिहर मजदूर यूनियन के कार्यकर्ता मौजूद रहे।