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सात साल से मायके में रह रही थी पत्नी
परिजनों के अनुसार नारायण गुप्ता की पत्नी सीता देवी करीब सात वर्षों से अपने मायके में रह रही थी। उसका मायका दुर्गावती थाना क्षेत्र के सरैया गांव में बताया गया है। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद के कारण दोनों अलग रह रहे थे। परिजनों का कहना है कि इस पारिवारिक परिस्थिति को लेकर नारायण काफी समय से परेशान रहता था। नारायण और सीता के तीन पुत्र हैं। बड़ा बेटा प्रीतम साह करीब 13 वर्ष और मंझला बेटा श्रीकांत शाह करीब 10 वर्ष अपने पिता के साथ बरूना में रहते थे, जबकि छोटा बेटा रविकांत अपनी मां के साथ ननिहाल में रह रहा था।
परिवार को साथ लाने की कई बार हुई कोशिश
मृतक के पिता गिरधारी शाह ने बताया कि पति-पत्नी के बीच विवाद समाप्त कराने और दोनों को दोबारा साथ लाने के लिए परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार प्रयास किया था। दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी कराई गई, लेकिन मामला सुलझ नहीं सका। परिजनों के मुताबिक, पत्नी की ओर से भभुआ महिला थाना में आवेदन देकर बच्चों को अपने साथ ले जाने की मांग किए जाने की जानकारी भी परिवार को मिली थी। बच्चों के अलग-अलग रहने को लेकर भी परिवार में तनाव बना हुआ था।
रात में कमरे में गया, सुबह सामने आया मामला
परिवार के लोगों ने बताया कि घटना की रात नारायण अपने कमरे में सोने चला गया था। उसके दोनों बच्चे दादा के पास सो रहे थे। इसी दौरान रात में किसी समय उसने कमरे की छत में लगी कुंडी से फंदा लगा लिया। बाद में घटना की जानकारी परिवार के लोगों को हुई तो घर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर मनिहारी टीओपी की पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शव को भभुआ सदर अस्पताल भेजा, जहां आवश्यक कागजी प्रक्रिया और पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शव घर पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।
पुलिस कर रही घटना की जांच
पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला फंदा लगाने से मौत का प्रतीत हो रहा है। हालांकि, घटना के कारणों और इससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस परिजनों से पूछताछ कर मामले की जानकारी जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी



