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एसपी विनय तिवारी ने बताया कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए मामला ईओयू को भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में आरोपी द्वारा कथित तौर पर ठगी की रकम से करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये की संपत्ति अर्जित करने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी से प्राप्त धनराशि किन-किन बैंक खातों में पहुंची और उसका इस्तेमाल किस प्रकार संपत्तियां खड़ी करने में किया गया। वित्तीय दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की गहन पड़ताल जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत आरोपी की संपत्तियों को जब्त करने समेत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक अपराध और संगठित ठगी के मामलों में शामिल लोगों के पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस का फोकस अब केवल आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि ठगी से जुड़े पूरे आर्थिक तंत्र और धन के प्रवाह की पड़ताल पर भी है। इससे मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



