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जानकारी के अनुसार जमालपुर निवासी एक रेलकर्मी अगस्त माह के अंत में सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद उन्हें रेलवे से एकमुश्त भुगतान मिला था, जो उनके बैंक खाते में जमा था। दिसंबर में उनके व्हाट्सएप पर एक फॉर्म भेजा गया और फोन कर खुद को रेलवे विभाग का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि यदि पीपीओ अपडेट नहीं कराया गया तो पेंशन रोक दी जाएगी। डर और भ्रम की स्थिति में रेलकर्मी ने ठगों के कहने पर मोबाइल में एक यूपीआई से जुड़ा एप डाउनलोड किया और फिर ओटीपी साझा कर दिया। इसके बाद कुछ ही घंटों में कई बार लेनदेन कर उनके खाते से 22.55 लाख रुपये निकाल लिए गए। इसी तरह एक अन्य सेवानिवृत्त रेलकर्मी को भी उसी दिन पीपीओ बुक अपडेट कराने का झांसा दिया गया।
ठगों ने उनके दो अलग-अलग बैंक खातों से करीब 88 हजार रुपये की रकम निकाल ली। खाते में राशि कम होने के कारण उन्हें अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि हाल ही में रिटायर हुए कर्मचारियों की पूरी जानकारी साइबर ठगों तक कैसे पहुंच रही है। आशंका जताई जा रही है कि किसी स्तर पर डाटा लीक हो सकता है। साथ ही, बार-बार बड़ी रकम की निकासी के बावजूद बैंक की ओर से कोई चेतावनी न मिलना भी चिंता का विषय है। साइबर थाना पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सलाह दी है कि किसी भी तरह की पेंशन या पीपीओ से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक कार्यालय से ही संपर्क करें और अनजान कॉल या संदेशों से सतर्क रहें।