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बताया जाता है कि इससे पहले भी वे सिवाईपट्टी थाना में तैनात रह चुके हैं। वर्ष 2024 में निगरानी विभाग की टीम ने उन्हें 11 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। बाद में वे जेल भी गए थे। जमानत मिलने के बाद उनका तबादला कर दिया गया था, लेकिन विभागीय कार्रवाई जारी रही। मामले की जांच के लिए मनोज कुमार सिंह (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पूर्वी-2) को जांच पदाधिकारी बनाया गया था। जांच में रिश्वत लेने के आरोप सही पाए गए और रिपोर्ट में दारोगा को दोषी बताया गया।
इस बीच इसी साल जनवरी में लालगंज थाना के अपर थानाध्यक्ष आदित्य कुमार के बयान पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष संतोष कुमार सहित कई लोगों को आरोपित बनाया गया था। आरोप था कि डकैती के एक मामले में छापेमारी के दौरान बरामद सोना-चांदी के आभूषण और नकदी का गबन कर लिया गया। मामला वरीय अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद जांच कराई गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष और अन्य आरोपितों को निलंबित कर दिया गया था। वहीं दारोगा सुमनजी झा के खिलाफ विभागीय जांच पूरी होने के बाद डीआईजी ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।