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मिट्टी की मूर्तियों को छोड़ अष्टधातु की प्रतिमाओं पर थी नजर
मंदिर की देखरेख करने वाले बृजमोहन प्रसाद के अनुसार, मंदिर में वर्षों से नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती आ रही है। इससे पहले यहां चोरी की कोई घटना नहीं हुई थी। इस बार चोरों ने बेहद चुनिंदा तरीके से वारदात को अंजाम दिया। मंदिर में मौजूद मिट्टी की मूर्तियों और अन्य प्रतिमाओं को चोरों ने हाथ तक नहीं लगाया, जबकि अष्टधातु से निर्मित सभी आठ छोटी मूर्तियां गायब कर दीं। इससे आशंका जताई जा रही है कि चोरों को मंदिर में रखी प्राचीन अष्टधातु की प्रतिमाओं की जानकारी पहले से थी और उन्होंने पूरी योजना के साथ चोरी की घटना को अंजाम दिया।
धनतेरस की रात मंदिर में नहीं लगा था ताला
बताया जाता है कि धनतेरस के अवसर पर मंदिर में ताला नहीं लगाया गया था। इसी परिस्थिति का फायदा उठाकर चोर मंदिर में दाखिल हुए और कीमती प्रतिमाओं समेत पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले सामानों की चोरी कर ली। शनिवार की सुबह जब पुजारी नियमित पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे तो वहां से मूर्तियां और अन्य सामान गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद मंदिर के देखरेखकर्ता को सूचना दी गई और पुलिस को घटना से अवगत कराया गया।
सीसीटीवी कैमरों से चोरों तक पहुंचने की कोशिश
मंदिर में चोरी की सूचना मिलते ही भगवान बाजार थाने के प्रभारी थानाध्यक्ष सूरज कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए। फिलहाल पुलिस आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि चोरी की वारदात में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। करीब डेढ़ सौ साल पुरानी अष्टधातु की आठ प्रतिमाओं की चोरी को पुलिस गंभीरता से ले रही है। पुलिस चोरी गई मूर्तियों की बरामदगी और आरोपितों तक पहुंचने के लिए जांच में जुटी हुई है। प्राचीन धार्मिक प्रतिमाओं की चोरी से स्थानीय श्रद्धालुओं में नाराजगी है। लोगों ने मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और चोरी गई मूर्तियों को जल्द बरामद करने की मांग की है।