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एक बैंक खाता और कई राज्यों में ठगी के तार
मामले की जांच कैमूर साइबर थाना में दर्ज म्यूल अकाउंट से जुड़े मामले के बाद शुरू हुई। पुलिस की नजर भभुआ स्थित एक्सिस बैंक के श्री श्याम इंटरप्राइजेज नामक करंट अकाउंट पर गई। जांच में पता चला कि 11 मार्च से 22 अप्रैल 2026 के बीच खाते में करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये क्रेडिट हुए और लगभग 1 करोड़ 35 लाख रुपये की रकम निकाली गई।
बड़ी रकम के इस असामान्य लेनदेन ने पुलिस का संदेह बढ़ाया और खाते से जुड़े लोगों की जांच शुरू की गई।
दस्तावेज और बैंकिंग जानकारी दूसरे लोगों तक पहुंचाने का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, खाते से जुड़े लोगों से पूछताछ में पुनीत तिवारी की भूमिका सामने आई। आरोप है कि बैंक खाता खुलवाने के बाद उसने चेकबुक, पासबुक, सिम कार्ड समेत खाते से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज अपने पास रख लिए थे। यह खाता धीरज कुमार और अखिलेश सिंह के नाम से संयुक्त करंट अकाउंट बताया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाते को वास्तव में कौन-कौन लोग संचालित कर रहे थे और इससे जुड़े लेनदेन का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है।
NCRP पर सामने आईं आठ शिकायतें
पुलिस ने जब संबंधित बैंक खाते की जानकारी NCRP पोर्टल पर खंगाली तो उसके खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से कुल आठ साइबर अपराध संबंधी शिकायतें मिलीं। शिकायतों के तार झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड तक जुड़े बताए जा रहे हैं। इन शिकायतों में चार मामले ऐसे भी हैं, जिनमें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से ठगी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, झारखंड में करीब एक करोड़ रुपये, चंडीगढ़ में लगभग 3.45 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र में करीब 25 लाख रुपये और तमिलनाडु में लगभग 26 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी की शिकायतें जांच में सामने आई हैं।
खाता फ्रीज हुआ तो बैंक पहुंचा आरोपी
साइबर डीएसपी नीतू सिंह के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया था। इसके बाद पुनीत तिवारी कथित तौर पर खाते को दोबारा चालू कराने के लिए बैंक पहुंचा। पुलिस ने इसी दौरान उसकी भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ाई और पर्याप्त संदेह पाए जाने पर उसे गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक खाते का इस्तेमाल किन लोगों ने किया और करोड़ों रुपये के लेनदेन के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी का तरीका
जांच एजेंसियों के नाम पर होने वाली साइबर ठगी में अपराधी पहले लोगों को फोन या वीडियो कॉल करते हैं। खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स विभाग या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को किसी गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी दी जाती है। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या फर्जी बैंक खाते जैसे मामलों का डर दिखाकर पीड़ित को लगातार निगरानी में रखने का दबाव बनाया जाता है। इसी तरीके को साइबर अपराध की भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है और कई मामलों में पीड़ित से बड़ी रकम ट्रांसफर करा ली जाती है।
अब गिरोह के बाकी सदस्यों पर नजर
कैमूर साइबर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने पर है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, लेनदेन और देशभर में दर्ज शिकायतों के बीच कड़ियां जोड़ रही है। साइबर डीएसपी नीतू सिंह ने बताया कि पुनीत तिवारी को करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी से पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान तथा उनकी भूमिका का पता लगाया जा रहा है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद इस अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।



