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NEET UG पुनर्परीक्षा में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, 30 गिरफ्तार; डमी अभ्यर्थियों और बायोमेट्रिक कर्मियों का गठजोड़ बेनकाब

NEET UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा: लखीसराय में 30 गिरफ्तार, डमी परीक्षार्थी और बायोमेट्रिक कर्मी शामिल

Bihar: लखीसराय। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) की पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय जिले में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में डमी (फर्जी) परीक्षार्थी, मूल अभ्यर्थी, बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मी तथा अन्य सहयोगी शामिल हैं। इस पूरे मामले का मुख्य सरगना अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। मंगलवार को समाहरणालय स्थित मंत्रणा कक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार ने संयुक्त रूप से पूरे मामले की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर NEET UG पुनर्परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और कदाचारमुक्त बनाने के लिए प्रत्येक केंद्र पर केंद्राधीक्षक, दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।

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परीक्षा के दौरान प्रशासन को सूचना मिली कि कुछ केंद्रों पर मूल अभ्यर्थियों की जगह डमी परीक्षार्थियों को बैठाने की कोशिश की जा रही है। सूचना के बाद अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया गया। टीम ने परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर अभ्यर्थियों के दस्तावेज, पहचान पत्र और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का गहन सत्यापन किया। जांच के दौरान लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों—केआरके हाईस्कूल, केंद्रीय विद्यालय और उच्च विद्यालय हसनपुर—में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। सत्यापन के क्रम में कई ऐसे परीक्षार्थी पकड़े गए जो वास्तविक अभ्यर्थी नहीं थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में लगे कुछ कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया। प्रशासन के अनुसार, अब तक गिरफ्तार किए गए 30 लोगों में नौ फर्जी परीक्षार्थी, तीन मूल अभ्यर्थी, 18 बायोमेट्रिक कर्मी तथा अन्य सहयोगी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान हो सके।

इस मामले को लेकर जिले के कवैया थाना और किऊल थाना में कुल तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस विभिन्न धाराओं के तहत मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित गिरोह की करतूत प्रतीत होती है, जो अभ्यर्थियों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अवैध तरीके से सफलता दिलाने का लालच देकर फर्जीवाड़े को अंजाम देता था। जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने कहा कि परीक्षा की शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार ने बताया कि मामले के मास्टरमाइंड की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरे नेटवर्क की वित्तीय और तकनीकी जांच भी कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके लिए कितनी राशि का लेन-देन किया गया था। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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