Bihar | लखीसराय: जिले के सूर्यगढ़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उरैन पंचायत के सहान मुसहरी गांव निवासी नारायण मांझी की पत्नी अंजली देवी रविवार की सुबह प्रसव पीड़ा के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थीं।
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प्रसव के तुरंत बाद नर्स ममता और एक आशा कार्यकर्ता द्वारा नवजात शिशु को प्रसूता के परिजनों को सौंपा गया। परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें बताया कि लड़के का जन्म हुआ है, लेकिन जब पंजीकरण के लिए बच्चे का नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई तो परिजनों को जो शिशु दिया गया, वह लड़की निकली।
परिवार का आरोप है कि जन्म के तुरंत बाद नवजात को बदल दिया गया और इस दौरान प्रसूता व परिजनों को गुमराह किया गया। इस घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया और स्वास्थ्य केंद्र परिसर में हड़कंप मच गया।
पीड़ित नारायण मांझी ने मामले को लेकर सूर्यगढ़ा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और अपने वास्तविक बच्चे को वापस दिलाने की मांग की है। वहीं, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वायके दिवाकर ने बताया कि मामले की जानकारी पुलिस प्रशासन को दे दी गई है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही बताते हुए मानवता के खिलाफ कृत्य करार दिया है। इस मामले ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की विश्वसनीयता को भी गहरा आघात पहुंचाया है।