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मोबाइल पर भेजता था खतरनाक फाइल
जांच में पता चला है कि आरोपी लोगों के मोबाइल फोन पर एपीके (APK) फाइल भेजता था। अनजाने में जब कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल कर लेता था, तो साइबर अपराधियों को उसके मोबाइल का नियंत्रण मिल जाता था। इसके बाद बैंक खाते, पासवर्ड, ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारियां उनके हाथ लग जाती थीं, जिनका इस्तेमाल कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जाता था।
पूछताछ में सामने आया बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। जांच एजेंसियों को मिले शुरुआती तथ्यों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए करीब एक करोड़ रुपये की साइबर ठगी किए जाने की आशंका है। पुलिस आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है।
दो अन्य संदिग्धों की तलाश
साइबर डीएसपी ने बताया कि मामले में दो अन्य लोगों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विभिन्न तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।
आईटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ साइबर थाना में आईटी एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
छापेमारी टीम में शामिल रहे ये अधिकारी
इस कार्रवाई में पुलिस निरीक्षक अभयकांत चंदा, डीएपी संदीप साह, लक्ष्मण कुमार, सिकंदर कुमार और मुकेश कुमार समेत कई पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच इस गिरफ्तारी को पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को भी अनजान लिंक और एपीके फाइल डाउनलोड करने से बचना चाहिए, ताकि वे साइबर ठगी का शिकार न बनें।