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क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 18(1)(M) से जुड़ा है। इस प्रावधान के अनुसार 4 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने के अयोग्य माना जाता है। जांच में सामने आया कि विकास तिवारी के चार बच्चे हैं, जिनमें से तीन का जन्म 4 अप्रैल 2008 के बाद हुआ है।
शिकायत से खुला मामला
साल 2025 में भभुआ वार्ड संख्या 12 के निवासी जैनेंद्र कुमार आर्य ने राज्य निर्वाचन आयोग में वाद दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन के दौरान विकास तिवारी ने अपने बच्चों की जानकारी गलत दी और तथ्य छुपाए। मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों में यह स्पष्ट हुआ कि निर्धारित तिथि के बाद उनके तीन संतान हैं।
जांच में क्या पाया गया
राज्य निर्वाचन आयोग की जांच में यह पुष्टि हुई कि विकास तिवारी ने अयोग्यता के बावजूद गलत शपथ पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा और पद हासिल किया। इसी आधार पर उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी किया गया।
आगे क्या होगा
आयोग ने जिला पदाधिकारी कैमूर को निर्देश दिया है कि मुख्य पार्षद का पद रिक्त मानते हुए नियमानुसार नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए। इस फैसले के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।