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मिली जानकारी के अनुसार 41वीं वाहिनी एसएसबी रानीडांगा के कमांडेंट विकास कुमार के निर्देश पर शुक्रवार को न्यू ब्रिज इलाके में नियमित जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान बीआईटी टीम ने एक सफेद रंग की कार को रोककर उसमें सवार दो विदेशी महिलाओं से पूछताछ की। दस्तावेजों की जांच के लिए दोनों को इमिग्रेशन काउंटर भेजा गया, जहां उनके पासपोर्ट पर लगे एग्जिट स्टंप संदिग्ध पाए गए। जांच आगे बढ़ती उससे पहले महिलाओं के साथ मौजूद एक संदिग्ध एजेंट मौके का फायदा उठाकर वाहन समेत फरार हो गया। हालांकि उसकी तस्वीरें और वाहन की गतिविधियां चेकपोस्ट पर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई हैं। फरार एजेंट की तलाश में सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा क्षेत्र में सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है। इमिग्रेशन विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच में यह स्पष्ट हो गया कि दोनों महिलाओं को किसी प्रकार का वैध एग्जिट स्टंप जारी नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, विभाग के रिकॉर्ड में उनके यात्रा संबंधी किसी आधिकारिक प्रक्रिया का भी उल्लेख नहीं मिला। इसके बाद एसएसबी और इमिग्रेशन अधिकारियों ने संयुक्त पूछताछ शुरू की, जिसमें एक संगठित फर्जी इमिग्रेशन सिंडिकेट के सक्रिय होने के संकेत मिले।
गिरफ्तार महिलाओं की पहचान थाइलैंड निवासी 43 वर्षीय पिमचानोक केटला और 38 वर्षीय चिंतरा बुद्धाफोंग के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि दोनों महिलाएं लंबे समय से भारत के अलग-अलग शहरों में स्पा और मसाज सेंटरों में काम कर रही थीं। इनमें से एक महिला का वीजा जनवरी 2026 में ही समाप्त हो चुका था, बावजूद इसके वह अवैध रूप से भारत में रह रही थी। प्राथमिक जांच में सरकारी सुरक्षा सील की जालसाजी, फर्जी यात्रा दस्तावेज तैयार करने और विदेशी नागरिकों को अवैध तरीके से सीमा पार कराने वाले बड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। दोनों महिलाओं को वीजा अवधि समाप्त होने के बाद अवैध रूप से भारत में रहने तथा फर्जी दस्तावेजों के जरिए देश छोड़ने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार कर खोरीबारी थाना पुलिस को सौंप दिया गया है। फिलहाल एसएसबी, इमिग्रेशन विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियां फरार एजेंट और उससे जुड़े नेटवर्क की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। इस मामले को सीमा सुरक्षा से जुड़ी बड़ी साजिश के तौर पर देखा जा रहा है।