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घटना के बाद परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय उत्तर प्रदेश के अमवा स्थित सती माई मंदिर में झाड़-फूंक कराने ले गए। वहां कुछ समय तक उनकी हालत सामान्य लगने पर उन्हें वापस घर ले आया गया। हालांकि शाम होते-होते उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए चंदौली के एक निजी अस्पताल लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मृत्यु के बाद शव को भभुआ सदर अस्पताल लाया गया, जहां चैनपुर पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रविवार को पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
सूर्यकला देवी अपने पीछे 17 वर्षीय एक बेटी और 10 व 8 वर्ष के दो बेटों को छोड़ गई हैं। उनकी असामयिक मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में शोक का माहौल है।
मानसून के दौरान कैमूर जिले में सर्पदंश की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस वर्ष अब तक जिले में सांप के काटने से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि सर्पदंश होने पर किसी भी प्रकार के झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय न गंवाएं। मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) से उपचार कराना ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।



