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चैनपुर बाजार में कस्बा, मिर्जा मुहल्ला और मुगलपुरा मुहल्ला की ओर से अलग-अलग अखाड़े और जुलूस निकाले गए। खलीफाओं की अगुवाई में निकले अखाड़े बाजार होते हुए शाही जामा मस्जिद पहुंचे। इस दौरान “या हसन, या हुसैन” की सदाओं से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। अधिकांश लोग काले वस्त्रों में नजर आए और हाथों में पारंपरिक हथियार लिए हुए थे। मुहर्रम के दौरान लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम किया। विभिन्न अखाड़ों में लाठी भांजने, जंजीरी मातम करने और अन्य पारंपरिक प्रस्तुतियों की होड़ देखने को मिली। देर रात सभी ताजियों को जुलूस के साथ कर्बला ले जाया गया, जहां फातेहा पढ़ने के बाद ताजियों का पहलाम किया गया और लोगों ने इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर लोगों ने कर्बला की ऐतिहासिक घटना को याद किया, जिसमें इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत दी थी। उनकी कुर्बानी आज भी इंसानियत, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष का प्रतीक मानी जाती है। मुहर्रम जुलूस को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सिकंदरपुर समेत संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी तथा मजिस्ट्रेट की मौजूदगी सुनिश्चित की गई थी। सिकंदरपुर में चैनपुर बीडीओ शुभम प्रकाश, सीओ अनिल प्रसाद सिंह, चांद-चैनपुर सर्किल इंस्पेक्टर मनोज कुमार, थानाध्यक्ष विजय प्रसाद सहित भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में ताजिया जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।



