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कैमूर के गांधी आवासीय विद्यालय से जुड़ा गंभीर विवाद, पूर्व सहायिका ने प्रधानाचार्य के भाई पर यौन शोषण का लगाया आरोप; एसपी से लगाई न्याय की गुहार

कैमूर: पूर्व सहायिका ने विद्यालय प्रिंसिपल के भाई पर यौन शोषण का लगाया आरोप, एसपी ने जांच टीम गठित

Bihar: कैमूर जिले के भभुआ स्थित गांधी आवासीय विद्यालय से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है। विद्यालय में पूर्व में कार्यरत एक महिला सहायिका ने विद्यालय के प्रधानाचार्य के छोटे भाई पर यौन शोषण, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़िता ने अब कैमूर पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

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रामगढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने अपने आवेदन में बताया है कि वह 29 सितंबर 2025 से 15 दिसंबर 2025 तक गांधी आवासीय विद्यालय में सहायिका के पद पर कार्यरत थी। इसी दौरान उसकी पहचान विद्यालय के प्रधानाचार्य उमेश सिंह के छोटे भाई, जहानाबाद निवासी दिलीप कुमार से हुई। महिला का आरोप है कि परिचय के बाद आरोपी ने करीब दो वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके दोनों पुत्रों के साथ मारपीट की गई तथा पूरे परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। स्थानीय थाना में शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उसने पुलिस अधीक्षक कैमूर को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

दूसरी ओर, गांधी आवासीय विद्यालय के प्रधानाचार्य उमेश सिंह ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि महिला के बेटे और बेटी की विद्यालय में लगभग एक वर्ष की फीस बकाया है। फीस जमा कराने को लेकर विवाद होने के बाद उनके परिवार को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय नहीं भेजती थी। इस मामले पर कैमूर के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है। पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। आरोपों की सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

 

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