Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
विकास कुमार तीन भाइयों में सबसे छोटा था और गांव में रहकर पढ़ाई करता था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार के मुताबिक, पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां के लिए बेटों का ही सहारा था। बेटे की मौत की खबर के बाद मां का रो-रोकर बुरा हाल है।वहीं, बिट्टू कुमार दो भाइयों में बड़ा था। वह पढ़ाई के साथ अपने पिता के खेती-किसानी के काम में भी हाथ बंटाता था। परिजनों के अनुसार उसने गुरुवार को मैट्रिक परीक्षा के लिए दोबारा फार्म भरा था। बताया गया कि उसके पिता ने शुक्रवार को उसे घर से बाहर जाने से मना भी किया था, लेकिन पिता के मोहनिया चले जाने के बाद वह दोस्तों के साथ बाइक से निकल गया।
तीसरा मृतक दिलखुश राय भी दो भाइयों में बड़ा था और दसवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके पिता जैनुद्दीन राय मुंबई में रहते हैं और शुक्रवार को ही मुंबई के लिए रवाना हुए थे। उन्हें शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि घर से निकलने के कुछ ही समय बाद परिवार पर इतनी बड़ी विपत्ति टूट पड़ेगी। एक ही गांव के तीन युवाओं की मौत की खबर फैलते ही बघिनी में मातम छा गया। घरों में चीख-पुकार मच गई और परिजनों के विलाप से पूरा माहौल गमगीन हो उठा। घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतकों के घर पहुंचकर शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना दे रहे हैं।



