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जानकारी के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई थाना में गोपाल कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में उनके पास करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति मिलने की बात सामने आई है, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 81.5 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इसके बाद विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट प्राप्त कर शनिवार सुबह कार्रवाई शुरू की गई। ईओयू की टीम ने पटना के मजिस्ट्रेट कॉलोनी स्थित जगत विला अपार्टमेंट के फ्लैट, कंकड़बाग स्थित आवास, जमुई में केकेएम कॉलेज के समीप किराए के मकान तथा झाझा स्थित ग्रामीण कार्य विभाग कार्यालय में एक साथ छापेमारी की। झाझा कार्यालय में डीएसपी सुनील कुमार के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम सुबह करीब आठ बजे पहुंची। उस समय कार्यालय में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बाद में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को बुलाकर कार्यालय खुलवाया गया। तलाशी के दौरान टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तलाश थी। इस बीच विभाग के कैशियर को फोन कर कार्यालय बुलाया गया, लेकिन काफी देर तक उनके नहीं पहुंचने पर निगरानी टीम ने झाझा पुलिस को सूचना दी।
पुलिस के पहुंचने के बाद कार्यालय के लाकर को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान अन्य अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनके चेहरों पर कार्रवाई का डर साफ दिखाई दे रहा था। सूत्रों की मानें तो छापेमारी की सूचना मिलते ही कई पदाधिकारी एवं कर्मी कार्यालय नहीं पहुंचे। वहीं आसपास के लोगों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा का माहौल बना रहा। बताया जा रहा है कि पूरी कार्रवाई की निगरानी के लिए दो दंडाधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। स्थानीय स्तर पर कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के कार्यों को लेकर पहले से असंतोष की बात सामने आती रही है। पूर्व एमएलसी संजय प्रसाद ने दावा किया कि जून 2025 में उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर निगरानी विभाग तक पत्र भेजकर अभियंता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। वहीं ईओयू के डीएसपी सुनील कुमार ने बताया कि कैशियर को बुलाया गया था, लेकिन उनके नहीं आने के कारण पुलिस की मौजूदगी में लाकर तोड़ने की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि तलाशी पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।



