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जानकारी के अनुसार, अमियवरा गांव निवासी स्वर्गीय रामचंद्र सिंह के पुत्र बलदेव सिंह रोज की तरह सोमवार रात मवेशियों को चारा खिलाने के बाद पशुशाला में बोरसी से धुआं कर रहे थे। इसका उद्देश्य मच्छरों को भगाना था। इसके बाद वह पशुशाला से निकलकर सोने चले गए। रात करीब आधी रात के समय बोरसी से निकली चिंगारी झोपड़ी के किसी हिस्से में जा गिरी, जिससे अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग तेजी से फैल गई और पूरी पशुशाला आग की लपटों में घिर गई। पशुओं के फंसने की वजह से मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
आग की लपटें देखकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक पशुशाला और उसमें रखा मवेशियों का भूसा जल चुका था। आग की चपेट में आने से कई मवेशी भी झुलस गए। पंचायत के उप मुखिया धर्मराज यादव और वार्ड सदस्य मनोज सिंह के मुताबिक, झुलसे मवेशियों में एक गर्भवती गाय की हालत काफी गंभीर है। हादसे के बाद पशुपालक के सामने आर्थिक नुकसान की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर पीड़ित पशुपालक को उचित मुआवजा और सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।



