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विशेष रूप से दहेज में स्कॉर्पियो वाहन की मांग की जाती थी और मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ लगातार मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना की जाती थी। आवेदन में कहा गया है कि पति विकास कुमार उपाध्याय अक्सर गाली-गलौज करता था और मायके से स्कॉर्पियो लाने का दबाव बनाता था। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती थी। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि सास आशा देवी तथा देवर आदर्श उर्फ आशिष भी प्रताड़ना में बराबर शामिल रहते थे। तीनों मिलकर विवाहिता के साथ मारपीट करते थे, कई-कई दिनों तक भोजन नहीं देते थे और करंट लगाकर अथवा अन्य तरीके से हत्या करने की धमकी देते थे। प्रताड़ना की जानकारी सीता समय-समय पर अपने मायके वालों को भी देती थी। पीड़ित पिता के अनुसार मंगलवार की रात तीनों आरोपितों ने मिलकर उनकी पुत्री की हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को कहीं गायब कर दिया। काफी खोजबीन के बावजूद बेटी का कोई सुराग नहीं मिलने पर उन्होंने करमचट थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति विकास कुमार उपाध्याय, सास आशा देवी और देवर आदर्श उर्फ आशिष के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ एफएसएल की टीम भी तेनुआ गांव पहुंची, लेकिन आरोपितों के घर पर ताला बंद होने के कारण वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र नहीं किए जा सके। पुलिस का कहना है कि घर खुलने और आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद एफएसएल टीम दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। इधर, घटना के बाद से आरोपितों का घर बंद पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार पूरा परिवार गांव छोड़कर फरार है। पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। इस संबंध में करमचट थानाध्यक्ष पंकज कुमार पासवान ने बताया कि बुधवार की शाम घटना की मौखिक सूचना मिली थी। गुरुवार को मृतका के पिता के लिखित आवेदन के आधार पर पति, सास और देवर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच कर रही है। शव की बरामदगी और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।



