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पिपरिया के पास काल बना सड़क हादसा: पेड़ से टकराया ऑटो, परिवार का इकलौता सहारा चला गया

मोहनिया में सड़क हादसा, ऑटो चालक अंशु कुमार शर्मा की मौत, दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

Bihar: कैमूर जिले के मोहनिया थाना क्षेत्र में गुरुवार की देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। पिपरिया गांव के समीप एक बैटरी चालित सीएनजी ऑटो अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े शीशम के पेड़ से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो चला रहे 36 वर्षीय चालक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई, वहीं मृतक के घर में चीख-पुकार गूंजने लगी।

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मृतक की पहचान दुर्गावती थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड निवासी अंशु कुमार शर्मा, पिता गिरिजा प्रसाद शर्मा के रूप में हुई है। बताया जाता है कि अंशु कुमार शर्मा ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। गुरुवार की रात करीब 10 बजे वह दुर्गावती रेलवे स्टेशन से रिजर्व सवारी लेकर पिपरिया गांव जा रहे थे। इसी दौरान मोहनिया थाना क्षेत्र के पिपरिया गांव के पास अचानक उनका ऑटो अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे स्थित शीशम के पेड़ से जा भिड़ा। हादसे में अंशु कुमार शर्मा को गंभीर चोटें आईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुट गए। वहीं, हादसे की खबर परिजनों तक पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।

10 और 5 साल के बेटों के सिर से उठा पिता का साया

इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतक अपने पीछे पत्नी रागिनी कुमारी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनका बड़ा बेटा विराट कुमार महज 10 वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा अभी पांच साल का है। जिन बच्चों की परवरिश और भविष्य संवारने की जिम्मेदारी पिता के कंधों पर थी, अब वे हमेशा के लिए पिता के स्नेह से वंचित हो गए। अंशु कुमार शर्मा ही परिवार की आजीविका का मुख्य आधार थे। उनकी असमय मौत से पत्नी और दोनों बच्चों के सामने न सिर्फ भावनात्मक संकट खड़ा हो गया है, बल्कि परिवार के भरण-पोषण की चिंता भी गहरा गई है।

एक हादसे ने छीन ली परिवार की खुशियां

सड़क दुर्घटना की इस घटना ने एक बार फिर वाहन चलाते समय सावधानी और सड़क सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है। रोजी-रोटी के लिए घर से निकले अंशु कुमार शर्मा को शायद अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया, तो दो मासूम बच्चों का बचपन पिता के साये के बिना रह गया।

 

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