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सदियों पुरानी परंपरा का होगा निर्वहन
मंदिर से जुड़े कार्यकर्ता बलदाउ सिंह ने बताया कि भादो की पहली सोमवारी पर बाबा दयाल नाथ स्वामी के जलाभिषेक की परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। इस परंपरा के तहत अमांव और आसपास के गांवों के अलावा उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु वाराणसी के रामनगर पहुंचते हैं। वहां से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए शिवनगरी अमांव आते हैं।
श्रद्धालुओं द्वारा बाबा का जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से शुरू किया जाता है, जो दिनभर जारी रहता है। इसके बाद शाम के समय स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मां काली की वार्षिक पूजा भी आयोजित की जाती है।
श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे ग्रामीण
पैदल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए वाराणसी से अमांव तक कई स्थानों पर सेवा शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, नाश्ता, पानी और ठहरने की व्यवस्था की जाती है। सेवा व्यवस्था को सफल बनाने में प्रभात पटेल, सुनील सिंह, हीरा सिंह, रोहित पटेल, हृदय सिंह समेत बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं के सहयोग से हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए इस तरह की सेवा व्यवस्था की जाती है। भादो की पहली सोमवारी पर अमांव में हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। बाबा दयाल नाथ स्वामी के दरबार में होने वाला जलाभिषेक इस बार भी श्रद्धा, आस्था और सेवा की अनूठी तस्वीर पेश करेगा।



