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74 श्रमिकों ने उठाई बकाया मजदूरी की मांग
मामला चांद पंचायत सहित आसपास के क्षेत्रों में पौधारोपण कार्य से जुड़ा है। श्रमिकों के अनुसार, चांद, भेरी, किलनी और कोनहरा मौजा में पौधारोपण के तहत काम कराया गया था। इन कार्यों में कुल 74 श्रमिकों के शामिल होने की बात सामने आई है। श्रमिकों ने बताया कि संबंधित क्षेत्रों में करीब 7,400 पौधे लगाए गए हैं। योजना के तहत 100 पौधों की देखभाल के लिए एक वनपोषक को प्रतिदिन 300 रुपये मजदूरी देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद भुगतान के समय मजदूरी की राशि घटाकर खाते में भेजी जा रही है। इससे नाराज श्रमिक पारस साह, बिंदल तेली, कन्हैया राम, रामधार राम, शिवकुमारी देवी, दुलारी देवी सहित अन्य लोगों ने कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।
300 रुपये की जगह 160 रुपये मिलने से नाराजगी
श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित जिम्मेदारी के अनुसार काम किया है, इसलिए उन्हें तय मजदूरी मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि तीन महीने तक भुगतान नहीं हुआ और अब जब राशि खाते में भेजी जा रही है, तो प्रतिदिन 300 रुपये के बजाय केवल 160 रुपये दिए जा रहे हैं। श्रमिकों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें निर्धारित दर के अनुसार पूरी मजदूरी चाहिए। उनका सवाल है कि जब काम पूरा कराया गया है, तो भुगतान में कटौती किस आधार पर की जा रही है।
ओवरसियर पर मनमाने तरीके से मजदूरी घटाने का आरोप
इस मामले में श्रमिकों की ओर से विभागीय ओवरसियर शशि चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मजदूरी भुगतान में अंतर की वजह जानने पर मास्टर रोल तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ पंचायतों में श्रमिकों की मजदूरी कम दर्शाते हुए मास्टर रोल अपलोड किया गया, जिसके कारण उनके खातों में कम राशि पहुंची। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित ओवरसियर का पक्ष सामने आना बाकी है। बताया जा रहा है कि चांद, चौरी, शिवरामपुर और सिरहिरा पंचायतों में श्रमिकों को कम मजदूरी मिलने की शिकायत है, जबकि लोहदन और वयरी पंचायतों में पूरी राशि का भुगतान किए जाने की बात कही गई है। श्रमिकों ने इस अंतर को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
रोजगार सेवक ने भी उठाए सवाल, पीओ ने दिया सुधार का भरोसा
चांद पंचायत के रोजगार सेवक भारती राम जी ने श्रमिकों की मांग को जायज बताते हुए ओवरसियर पर जानबूझकर मजदूरी कम किए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, विकसित भारत जी राम जी के कार्यक्रम पदाधिकारी रामेश्वर पाठक ने मामले में तकनीकी गड़बड़ी होने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि समस्या को सुधारने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में ओवरसियर शशि चौधरी से मोबाइल फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि श्रमिकों की मजदूरी में कटौती किस स्तर पर और किस आधार पर हुई। मामले में मास्टर रोल, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित पंचायतों के आंकड़ों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



