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टीम ने तत्काल उसे बाल श्रम से मुक्त कराकर दादर स्थित बाल कल्याण समिति (CWC) के सुपुर्द कर दिया। अभियान का नेतृत्व चैनपुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी रितिक रंजन ने किया। उनके अनुसार, बाल श्रम के मामलों में कानून बेहद सख्त है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों से जोखिमपूर्ण कार्य कराना भी दंडनीय अपराध है।
दोषी नियोजक को दो वर्ष तक की सजा, 50 हजार रुपये तक का जुर्माना तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्रति मुक्त बाल श्रमिक 20 हजार रुपये का अतिरिक्त दंड भी लगाया जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से मुक्त कराए गए प्रत्येक बाल श्रमिक को 3,000 रुपये की तात्कालिक सहायता राशि भी दी जाती है। इस अभियान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी दिनेश कुमार केशरी (भभुआ सदर), नितेश कुमार (भगवानपुर), रामराज सोनी (चांद), सोनाली चंद्रा (रामपुर), चाइल्ड हेल्पलाइन के पर्यवेक्षक विनोद कुमार यादव, औलिया आध्यात्मिक अनुसंधान केंद्र के राकेश कुमार, बाल कल्याण समिति के सदस्य तथा पुलिस बल की सक्रिय भागीदारी रही। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि कैमूर जिले में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर ऐसे विशेष अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।