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स्थानीय स्तर पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह वर्ष 2025 का है। वीडियो में संबंधित कर्मी को जैकेट पहने हुए देखा जा रहा है, जिससे लोगों द्वारा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह सर्दी के मौसम के दौरान रिकॉर्ड किया गया होगा। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि आवास योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभुकों से अवैध वसूली की जाती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
(नोट: वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है। NS NEWS भी वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
ग्रामीणों ने उठाए योजना में पारदर्शिता पर सवाल
क्षेत्र के कई ग्रामीणों का आरोप है कि आवास योजना के क्रियान्वयन में लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि कई वास्तविक जरूरतमंद परिवार आज भी योजना के लाभ से वंचित हैं, जबकि कुछ ऐसे लोगों को लाभ मिल गया है जिनके पास पहले से पक्का मकान मौजूद है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई मामलों में पात्रता और चयन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाई जाती। उनका मानना है कि यदि लाभुकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। लोगों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार यदि किसी प्रकार का भुगतान करने में सक्षम नहीं होते हैं तो उन्हें योजना का लाभ मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
जांच की मांग तेज
वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
प्रशासन ने कहा- होगी सत्यता की जांच
मामले को लेकर जानकारी लेने पर प्रभारी डीडीसी अनिल कुमार ने बताया कि एक वीडियो वायरल होने की सूचना मिली है, जिसमें रुपये के लेन-देन का मामला सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की सत्यता की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले को लेकर लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं और मामले की वास्तविकता क्या है।



