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विद्यालय परिसर में कब्जे को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्राम पंचायत उदरामपुर के पूर्व मुखिया सुरेंद्र बिंद के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लोहरा गांव में करीब 30 से 35 वर्ष पूर्व शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक विद्यालय की शुरुआत की गई थी। विद्यालय में लगातार पठन-पाठन होता रहा है, लेकिन अब इसकी जमीन और आसपास के भूखंडों को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों ने विद्यालय की जमीन और आसपास की भूमि की बिक्री किए जाने की बात कही है। वहीं, कुछ लोग मकान निर्माण के लिए पाइलिंग करा रहे हैं। इसके अतिरिक्त विद्यालय की छत पर कटी हुई फसल सुखाने, विद्यालय के सामने मवेशियों को बांधने तथा परिसर के आसपास ट्रैक्टर और अन्य वाहन व उपकरण खड़े करने की शिकायत भी की गई है।
बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की आवाजाही पर असर
आवेदन देने पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय परिसर में अलग-अलग तरह से किए जा रहे कथित अतिक्रमण के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि जब संबंधित लोगों को विद्यालय की जमीन पर कब्जा करने से रोका जाता है, तो उनके द्वारा जमीन खरीदने और उसे अपनी संपत्ति होने का दावा किया जाता है। इसी विवाद के कारण विद्यालय की भूमि के स्वामित्व और उसकी स्थिति की जांच की मांग उठाई गई है। ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर विद्यालय की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
सीओ ने जांच के दिए निर्देश
इस मामले में चैनपुर के अंचलाधिकारी आमिर अजीम ने बताया कि लोहरा गांव के काफी संख्या में ग्रामीण कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने आवेदन देकर शिकायत की है कि प्राथमिक विद्यालय लोहरा की जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई है। सीओ ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित राजस्व कर्मचारी को स्थल निरीक्षण करने और जमीन की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामले में प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है। अब स्थल निरीक्षण की रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि विद्यालय की जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और अतिक्रमण संबंधी शिकायतों में कितनी सच्चाई है।



