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23 महिलाएं हाई रिस्क जोन में मिलीं
स्वास्थ्य जांच के दौरान 23 गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर 8 ग्राम से कम पाया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कम हीमोग्लोबिन वाली इन महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है। उनकी विशेष निगरानी और देखभाल के लिए संबंधित आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है, ताकि समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके और हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर किया जा सके।
9 एएनएम, 3 जीएनएम और दो डॉक्टर रहे मौजूद
शिविर को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह सक्रिय रही। जांच कार्य में 9 एएनएम, 3 जीएनएम और 2 डॉक्टर शामिल रहे। स्वास्थ्यकर्मियों ने शिविर में पहुंची गर्भवती महिलाओं की जांच करने के साथ उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी।
भभुआ से पहुंची टीम ने महिलाओं से लिया फीडबैक
शिविर के दौरान भभुआ से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम में डीपीएम ऋषिकेश जायसवाल, डीएमईओ मधुसूदन कुमार, डीसीएम पियूष उपाध्याय, डीसीक्यूए डॉ. अभिनंदन पांडेय और डीएएम प्रभात कुमार शामिल रहे। टीम के सदस्यों ने शिविर में जांच कराने पहुंची गर्भवती महिलाओं से स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई सवाल किए और उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की जानकारी ली। महिलाओं से मिले फीडबैक और शिविर की व्यवस्था को लेकर टीम संतुष्ट नजर आई। जांच के लिए पहुंची गर्भवती महिलाओं ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर उनकी आवश्यक जांच की गई और उन्हें अल्पाहार भी उपलब्ध कराया गया। चैनपुर सीएचसी के स्वास्थ्य प्रबंधक अजय सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत नियमित रूप से गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की जाती है। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान किसी भी संभावित जटिलता की समय रहते पहचान कर महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है।


