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सम्राट सरकार के 30 दिन: विकास, सख्ती और नई व्यवस्थाओं की सात बड़ी पहल

सम्राट सरकार के 30 दिन: बिहार में 7 बड़े फैसले, शिक्षा से सुरक्षा तक नई पहल

Bihar: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद संभालने के एक महीने पूरे हो चुके हैं। 15 अप्रैल को शपथ लेने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सुधार, शिक्षा, महिला सुरक्षा, शहरी विकास और पारदर्शिता को केंद्र में रखते हुए कई बड़े फैसले लिये हैं। सरकार ने ‘समृद्ध बिहार’ और ‘सुशासन’ के एजेंडे के तहत ऐसी योजनाओं की शुरुआत की है, जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाला है। एक महीने के भीतर लिये गये सात प्रमुख फैसलों को सरकार अपनी प्राथमिक उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत कर रही है। इनमें अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती से लेकर शिक्षा और रोजगार तक कई अहम कदम शामिल हैं।

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NS News

1. 11 सैटेलाइट टाउनशिप का खाका तैयार
बढ़ते शहरी दबाव को कम करने के लिए बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन टाउनशिप में सुनियोजित कॉलोनियां, चौड़ी सड़कें, बाजार, हरित क्षेत्र और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे शहरों में भीड़ कम होगी और लोगों को बेहतर जीवनशैली मिल सकेगी। सासाराम को भी इस परियोजना से जोड़ने का प्रस्ताव सामने आया है।

2. महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘पुलिस दीदी’ योजना
महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘पुलिस दीदी योजना’ शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत 1500 स्कूटी महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों के आसपास उनकी मौजूदगी सुनिश्चित होगी, ताकि छेड़खानी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर रोक लगाई जा सके। इस योजना का उद्देश्य पुलिस और समाज के बीच भरोसा मजबूत करना भी है।

3. ‘सहयोग की त्रिवेणी’ से शिकायतों का समाधान
जनता की शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए सरकार ने ‘सहयोग की त्रिवेणी’ योजना लागू करने की घोषणा की है। इसमें सहयोग हेल्पलाइन 1100, ऑनलाइन पोर्टल और पंचायत स्तर पर विशेष शिविर शामिल हैं। हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगने वाले शिविरों में ब्लॉक, थाना और अंचल स्तर की शिकायतों की सुनवाई होगी। शिकायतों के निपटारे के लिए 30 दिन की समयसीमा तय की गई है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

4. हर प्रखंड में बनेगा मॉडल स्कूल
शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के एक चयनित उच्च माध्यमिक विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए 800 करोड़ रुपये मंजूर किये हैं। साथ ही डिग्री कॉलेज विहीन 208 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इसके तहत हजारों नए पदों का सृजन होने की संभावना है।

5. निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती
निजी विद्यालयों में फीस और अन्य शुल्क को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नए निर्देश जारी किये हैं। अब स्कूलों को फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी। मनमानी फीस वृद्धि और अनावश्यक शुल्क पर रोक लगाने की बात कही गई है। अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म अपनी पसंद की दुकान से खरीदने की स्वतंत्रता भी मिलेगी। फीस बकाया होने पर छात्रों को परीक्षा या रिजल्ट से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

6. बिहार के संवेदकों को प्राथमिकता
राज्य सरकार ने बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन कर 50 करोड़ रुपये तक के सिविल कार्यों में राज्य के संवेदकों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय ठेकेदारों और युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे तथा राज्य की आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।

7. जमीन रजिस्ट्री में ई-निबंधन व्यवस्था लागू
जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए ई-निबंधन व्यवस्था लागू की गई है। इस नई प्रणाली से कागजी प्रक्रिया कम होगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा देने का भी निर्णय लिया गया है।

अपराध और भ्रष्टाचार पर सख्त रुख
सरकार ने अपराध नियंत्रण को लेकर भी सख्त संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को जघन्य अपराधों के मामलों में जीरो टालरेंस नीति अपनाने का निर्देश दिया है। हाल के दिनों में कई पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की घटनाएं भी चर्चा में रही हैं।

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