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बस कहा गया है कि ऐसी कोई जानकारी मिले तो सूचित करें, सरकार की तरफ से सभी नागरिकों को यह बातें कहीं जा रही है कि कहीं कोई शराब पी रहा हो या शराब का स्टॉक किया जा रहा हो तो गुप्त रूप से सूचना दीजिए, ऐसे में शिक्षकों से भी कहा गया है तो इसमें गलत क्या है, शिक्षा मंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि शिक्षकों को जिम्मेदार नागरिक आप नहीं मानते क्या, शराब पीना गलत चीज है और इस विचार को शिक्षा के मंदिर से ही दिया जाए तो गलत क्या है, कंफ्यूजन क्रिएट किया जा रहा है।
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वहीं राजद के प्रवक्ता एवं वरिष्ठ नेता चितरंजन गगन ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की घोर कमी है, बिहार में आधे से ज्यादा शिक्षक के पद रिक्त है इससे कई स्कूलों में पढ़ाई लिखाई बाधित रहती है, अब सरकार शिक्षकों को शराब की बोतल खोजने में लगवा रही है, सरकार की जीद्द की वजह से पहले से ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था और भी चौपट हो जाएगी, पहले ही शिक्षकों से कई तरह के काम जैसे वोटिंग लिस्ट से जुड़े कार्य, चुनाव डयूटी और किसी तरह का सर्वेक्षण करवाया जाता रहा है, अब शिक्षकों का काम शराब खोजना भी कर दिया जा रहा है, खुले में शौच करने वालों को पकड़ने तो कभी बोरा बेचने का काम दिया जाता रहा है, शिक्षा कितनी प्रभावित होती है इसकी रत्ती मात्र परवाह भी सरकार को नहीं है, सरकार को अति शीघ्र फरमान वापस लेना चाहिए।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि शिक्षा विभाग के नए आदेश से शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा यह तुगलकी फरमान है, शिक्षक से कौन-कौन काम करायेगे नीतीश कुमार, जो काम पुलिस नहीं कर पाई वह काम सरकार शिक्षकों को दे रही है यह काफी गलत फैसला है इसे शिक्षकों और उनके परिवार की जान खतरे में पड़ेगी, जब नीतीश सरकार के डीजीपी नहीं खोज पाए बिहार में शराब की सप्लाई कौन करता है तो अब शिक्षक करेंगे, नीतीश कुमार गंभीरता से कोई फैसला नहीं लेते हैं, शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाई में लगाना चाहिए यह नया फरमान हास्यास्पद है, शराब माफिया शिक्षक पर हमला करेगा तो जवाबदेही कौन लेगा मुख्यमंत्री इस सवाल का जबाब बिहार की जनता को दे।
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वहीं भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि राज्य सरकार अब दारू खोजने में शिक्षकों को लगा रही है, यह शिक्षा विरोधी कदम है, सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूल जहां गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं उसको पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जाए, सरकार उसी तरफ लगातार काम कर रही है, इसी तरह सरकार शिक्षकों को शिक्षा से अलग विभिन्न तरह के कार्य में लगाती रही है।
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