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औद्योगिक विकास को लेकर भी सरकार ने तेजी दिखाने के संकेत दिए। गया में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को राज्य के लिए गेमचेंजर बताया गया, जिससे करीब 1.10 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। डोभी क्षेत्र में औद्योगिक थाना, हेलीपैड और बिजली-पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं को तय समय में पूरा करने पर जोर दिया गया। जल मार्ग विकास परियोजना की प्रगति 76.78 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। बैठक में निर्देश दिया गया कि आईडब्ल्यूटी उत्कृष्टता केंद्र के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
सहकारिता क्षेत्र में राज्य ने लगभग पूर्ण लक्ष्य हासिल कर लिया है। 4477 में से 4476 पैक्स को ई-पैक्स में परिवर्तित किया जा चुका है और शेष को भी जल्द ऑनलाइन करने का लक्ष्य तय किया गया है। सभी पैक्स में ई-आरपी सॉफ्टवेयर के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
शहरी स्वच्छता अभियान के तहत 45 डंपसाइट में से 9 का निस्तारण पूरा हो चुका है, जबकि 13 पर काम जारी है। पटना में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और पटना-मुंगेर में वेस्ट-टू-वंडर पार्क परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति और बिजली शिफ्टिंग जैसे मुद्दों में विभागीय समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए। नगर निकायों को जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने और रीयूज-रिसाइकिल मॉडल को सख्ती से अपनाने को कहा गया, ताकि कचरा मुक्त शहरों की रैंकिंग में सुधार हो सके।



